अब बच्चों को हर साल लगेगी निमोनिया के साथ कोरोना से बचाने वाली पीसीवी वैक्सीन

न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) न केवल बच्चों को निमोनिया से बचाएगी। बल्कि यह कोरोना से भी बचाने में महत्वपूर्ण कवच साबित होगी। प्रदेश में 8.5 लाख बच्चों का जन्म प्रतिवर्ष होता है। प्रतिवर्ष इतने बच्चों को यह टीका लगेगा यह टीका सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों को मुफ्त लगेगा

रांची दर्पण डेस्क। कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यह वैक्सीन इस लहर से निपटने में भी सहायक होगी क्योंकि कोरोना और निमोनिया के लक्षण लगभग समान होते हैं।

आज गुरुवार को निमोनिया टीकाकरण के राज्य स्तरीय लांचिंग कार्यक्रम में उक्त जानकारी देते हुए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य  मंत्री बन्ना गुप्ता ने आगे कहा कि बच्चों को पीसीवी लगने से राज्य में शिशु मृत्यु दर में और कमी आएगी जो वर्तमान में प्रति एक हजार जन्म पर 29 है। साथ ही यह वैक्सीन बच्चों को ब्रेन मेनिनजाइटिस से भी बचाएगी।

इससे पहले मंत्री की उपस्थिति में एक बच्चे को पीसीवी का टीका देकर इस टीकाकरण की लांचिंग की गई। इस तरह, बच्चों के नियमित टीकाकरण में पीसीवी को शामिल करनेवाल झारखंड छठा राज्य बन गया।

अभी तक बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश में ही यह नियमित टीकाकरण में शामिल था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, झारखंड के अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला ने कहा कि बच्चों में मृत्यु होने का एक बड़ा कारण निमोनिया भी रहा है। अब इस टीकाकरण से बच्चों की मृत्यु दर में कमी आएगी तथा बच्चों का सार्वभौम विकास भी होगा।

इस कार्यक्रम में वर्चुअल मोड में शामिल होते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि नवजात बच्चों को बचाने की दिशा में पीसीवी का टीकाकरण बड़ा कदम राज्य में लोग यह टीका अपने बच्चों को निजी केंद्रों पर 1600 रुपये प्रति डोज खरीदकर लगवाते थे।

देश में वर्ष 2018 में 1.27 लाख बच्चे निमोनिया से प्रभावित हुए थे। दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह बीमारी अधिक होती है।

उन्होंने कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े सभी सिविल सर्जनों से कहा कि वे इस टीकाकरण में बिल्कुल कोताही न बरतें। जिस तरह, कोरोना से निपटपने में सिविल सर्जनों ने काफी मेहनत की, उसी तरह बच्चों के टीकाकरण में भी मेहनत करें।

बता दें कि राज्य में यह टीका उन बच्चों का लगना शुरू हुआ है जिनका जन्म इस साल अप्रैल माह में हुआ है। यह टीका जन्म के डेढ़ महीना (छह सप्ताह) पर पीसीवी-1, साढ़े तीन महीने (14 सप्ताह) पर पीसीवी-2 और नौ महीना अर्थात 36 सप्ताह पर बूस्टर डोज दिया जाता है।

अभी तक यहाँ नियमित टीकाकरण में टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, खसरा, रूबेला, जेई तथा रोटा वायरस (दस्त) बीमारी ही शामिल थे।

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