आखिर कौन होंगे रिम्स के स्थाई निदेशक, सबके हैं यूं अपने तिकड़म

 रिम्स का स्थायी निदेशक बनने के लिए डॉ. दिनेश कुमार सिंह के अलावा रिम्स के वरीय डॉक्टर तुलसी महतो, डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. पीके सिंह, एम्स पटना के डॉ. उमेश बदानी, डॉ. एसके शाही, नई दिल्ली के डॉ. जेसी पासी, उत्तर प्रदेश के डॉ. राजकुमार, हजारीबाग मेडिकल कॉलेज के डॉ. एसके सिंह अन्य ने आवेदन किया है

-: नारायण विश्वकर्मा :-

राँची दर्पण डेस्क।  झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में निदेशक बनने को लेकर एक बार फिर होड़ मच गई है। वैसे तो कई वरीय डाक्टर दौड़ में हैं। लेकिन रिम्स के वरीय डॉक्टर तुलसी महतो निदेशक बनने के लिए अधिक बेचैन नजर आ रहे हैं।

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वे पिछली बार और इस बार भी निदेशक बनने के लिए झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे। अदालती लड़ाई में वे पिछली बार पूर्व निदेशक डॉ. दिनेश सिंह से हार गए थे। डॉ. सिंह ने आवेदन कर दिया तो, तुलसी महतो फिर कोर्ट पहुंच गए, पर उनकी इस बार भी याचिका खारिज हो गयी।

दिलचस्प बात तो ये है कि डेढ़ माह पूर्व भटिंडा के लिए विरमित हुए डॉ. दिनेश कुमार सिंह भी निदेशक बनने की कतार में हैं। शायद यही कारण है कि तुलसी महतो अपनी दावेदारी को पुख्ता करने के लिए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सवाल उठता है कि रिम्स निदेशक पद से खुद को विरमित करने के लिए डॉ दिनेश कुमार सिंह ने सीएम हेमंत सोरेन को निदेशक से खुद को विरमित करने के लिए मार्च में आग्रह किया था। उनकी नियुक्ति एम्स भटिंडा में हो चुकी थी। इसलिए उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जतायी थी।

rims 1स्वास्थ्य सचिव ने भारत सरकार से कोरोना संकटकाल तक उन्हें रिम्स में सेवा देने के लिए आग्रह किया था, जिसकी मंजूरी मिल गयी थी। लेकिन इस बीच बदली सरकार में हालात बदले हुए थे। कहा जा रहा था कि नये स्वास्थ्य मंत्री से उनकी ट्यूनिंग नहीं बनी रही है। दोनों के बीच अक्सर खींचतान की खबरें आ रही थीं।

स्वास्थ्य मंत्री उन्हें हटाने की मांग पर अड़े हुए थे। इधर, कोरोना की रफ्तार कम होने पर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने दोबारा संचिका तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भेजी थी, जिस पर सहमति दे दी गयी।

उस दौरान मार्च 2019 में थर्ड व फोर्थ ग्रेड में हुई नियुक्तियों को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने रद्द करने का आदेश दिया था। साथ ही इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था।मंत्री ने यह आदेश विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद दिया था। इसके बावजूद डॉ. दिनेश सिंह का फिर निदेशक पद के लिए आवेदन देना समझ से परे है।

कहा जाता है कि उनका दिल्ली कनेक्शन बहुत मजबूत है, लेकिन राज्य सरकार उन पर मेहरबान होगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है।

बता दें कि गत 21 जुलाई को झारखंड हाईकोर्ट में रिम्स के नए निदेशक की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई थी। अदालत ने फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष तुलसी महतो की याचिका खारिज कर दी।

तुलसी महतो ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रिम्स निदेशक की नियुक्ति को चुनौती दी थी। लेकिन अब रिम्स के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर रास्ता साफ हो गया है।

expert media news networkकोर्ट में सुनवाई के दौरान तुलसी महतो की ओर से कहा गया कि रिम्स के नए निदेशक की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को रद्द कर उन्हें निदेशक बनाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि रिम्स निदेशक के लिए गठित चयन समिति ने वर्ष 2018 की पैनल लिस्ट में उन्हें दूसरे स्थान पर रखा था, जबकि पहले स्थान पर डॉ. डीके सिंह थे। डीके सिंह के जाने के बाद अब रिम्स का निदेशक बनने का उनका अधिकार है। क्योंकि पैनल लिस्ट तीन साल के लिए होती है।

तुलसी महतो की दलील को खारिज करते हुए रिम्स के वकील ने कोर्ट को बताया था कि कोई भी व्यक्ति, जिसका नाम सेलेक्शन लिस्ट में था, वह यह नहीं दावा कर सकता है कि उसी लिस्ट के अनुसार ही नियुक्ति हो।

तर्क दिया गया कि नियुक्ति करनेवाले का यह अधिकार होता है कि वह नयी नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाले या पुराने पैनल के आधार पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति करे। कोई भी पैनल लिस्ट तीन साल के लिए प्रभावी नहीं होती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने तुलसी महतो की याचिका खारिज कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने रिम्स में नियमित नियुक्ति के लिए नवंबर-2017 में विज्ञापन निकाला गया था। 25 डॉक्टरों ने आवेदन दिया था। 18 डॉक्टरों का इंटरव्यू लिया गया।

दिसंबर को हुए इंटरव्यू के बाद तैयार पैनल में डॉ. डीके सिंह का नाम पहले नंबर पर था। इसके बाद ही यह मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा था। डॉ. डीके सिंह की नियुक्ति को उस समय भी कोर्ट में चुनौती देनेवाले डॉ. तुलसी महतो ही थे।

निदेशक नियुक्ति को लेकर बीएचयू के डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने फरवरी 2018 में झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने के सरकार के निर्णय और नया विज्ञापन निकालने को चुनौती दी थी।

इस बीच रिम्स में स्थायी निदेशक की नियुक्ति का मामला लटका रहा। करीब 10 महीने तक रिम्स प्रभारी निदेशक के भरोसे चला। अंततः सरकार के स्तर से ही रिम्स निदेशक की नियुक्ति का मामले सुलझाया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने डॉ. दिनेश सिंह के नाम पर सहमति दी। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि अब रिम्स शासी परिषद की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद डॉ. दिनेश कुमार सिंह के नाम की अधिसूचना जारी कर दी गई।

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