
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची में निजी स्कूलों द्वारा लगातार की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर अब जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में आयोजित अहम बैठक में जिले के निजी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रतिनिधियों को साफ संदेश दिया गया कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिन विद्यालयों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ायी है, वे 15 दिनों के भीतर अतिरिक्त राशि को मौजूदा सत्र की मासिक फीस में समायोजित करें और इसकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों पर अनियंत्रित फीस वृद्धि, अलग-अलग मदों में अतिरिक्त वसूली और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाते रहे हैं।
जिला प्रशासन की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि रांची जिले के 92 निजी विद्यालयों ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी की। यह संख्या अपने आप में बताती है कि निजी शिक्षा व्यवस्था में निगरानी और जवाबदेही की कितनी गंभीर आवश्यकता है।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति द्वारा तय 10 प्रतिशत की सीमा से अधिक फीस वृद्धि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही जो स्कूल लगातार प्रशासनिक बैठकों से अनुपस्थित रहे हैं, उनका फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का भी निर्देश दिया गया। प्रशासन यह भी जांच करेगा कि ऐसे विद्यालय वास्तविक रूप से संचालित हो रहे हैं या केवल कागजों पर अस्तित्व में हैं।
पीटीए गठन नहीं करने वाले स्कूल भी रडार परः
बैठक में अभिभावक शिक्षक संघ (पीटीए) के गठन की भी समीक्षा की गई। प्रशासन को जानकारी मिली कि जिले के 20 विद्यालयों ने अब तक पीटीए का गठन नहीं किया है। उपायुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पीटीए की सक्रियता निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हो सकती है, क्योंकि इससे अभिभावकों को सीधे निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिलती है।
अभिभावकों की शिकायतों को मिला प्रशासनिक समर्थनः
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने जिला प्रशासन की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि 92 विद्यालयों में नियम उल्लंघन की पुष्टि होना यह साबित करता है कि अभिभावकों द्वारा वर्षों से उठायी जा रही शिकायतें सही थीं।
उन्होंने कहा कि फीस एडजस्टमेंट प्लान तैयार करने और अतिरिक्त राशि को मासिक शुल्क में समायोजित करने का निर्देश अभिभावकों को सीधी राहत देगा। साथ ही जिन विद्यालयों में अब तक पीटीए का गठन नहीं हुआ है, उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आरटीई के तहत गरीब बच्चों के नामांकन पर भी जोरः
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बैठक में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों को सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए चयनित बच्चों का अनिवार्य रूप से नामांकन लेना होगा। प्रशासन ने संकेत दिया कि आरटीई नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या बदल पाएगी यह कार्रवाई निजी शिक्षा व्यवस्था?
विशेषज्ञ मानते हैं कि रांची जिला प्रशासन की यह पहल केवल फीस नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निजी शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में निजी स्कूलों की फीस में लगातार वृद्धि ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के अभिभावकों पर भारी आर्थिक दबाव डाला है। कई स्कूलों पर वार्षिक शुल्क, स्मार्ट क्लास फीस, डेवलपमेंट फीस और अन्य मदों में अतिरिक्त राशि वसूलने के आरोप लगते रहे हैं।
हालांकि सवाल यह भी है कि क्या प्रशासनिक सख्ती लंबे समय तक प्रभावी रह पाएगी या यह कार्रवाई केवल शुरुआती चेतावनी तक सीमित रह जाएगी। शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि नियमित ऑडिट, शुल्क निर्धारण समिति की सक्रिय निगरानी और पीटीए की सहभागिता सुनिश्चित हो जाए, तो निजी स्कूलों की मनमानी पर स्थायी नियंत्रण संभव है।
फिलहाल रांची में जिला प्रशासन की इस कार्रवाई ने हजारों अभिभावकों को राहत और उम्मीद दोनों दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि अगले 15 दिनों में निजी विद्यालय प्रशासनिक निर्देशों का कितना पालन करते हैं और नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है।
- Ranchi DC Cracks Down: लापुंग और हेहल CO समेत ईटकी कर्मचारी को शो-कॉज
- 67 साल पुराना सौदा रद्द: आदिवासी जमीन संरक्षण पर रांची हाइकोर्ट का बड़ा फैसला
- 15 साल से सक्रिय TSPC का जोनल कमांडर धराया, रांची-लातेहार बेल्ट में उग्रवाद को बड़ा झटका
- ओरमांझी-जैना मोड़ एक्सप्रेस-वे जल्द शुरू: 92% काम पूरा, जानें पूरा अपडेट
- रांची पहाड़ी मंदिर में सत्ता परिवर्तन की जंग: वीआईपी कल्चर बनाम वैधानिकता की जंग जारी










