
“जनता दरबार के समस्याओं को अगर इस सख्ती को लगातार लागू किया गया तो न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा…
रांची दर्पण डेस्क। रांची जिला प्रशासन (Ranchi DC Cracks Down) ने जन-शिकायतों पर ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जनता दरबार में आए मामलों की सुनवाई के दौरान लापुंग और हेहल अंचल के अंचलाधिकारियों (सीओ) तथा ईटकी अंचल के एक राजस्व कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई, जहां शिकायत मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई थी।
जमीन कब्जा और फर्जी कागज: लापुंग अंचल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन कब्जा करने की शिकायत सामने आई थी। आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद संबंधित अंचलाधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
उपायुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए शो-कॉज जारी करने का निर्देश दिया। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि जमीन से जुड़े विवादों में देरी या अनदेखी किस तरह भू-माफियाओं को बढ़ावा दे सकती है।
आय प्रमाण पत्र में देरी से छात्र का नुकसानः हेहल अंचल से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें आय प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनने के कारण एक छात्र का नामांकन रुक गया। शिक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित सीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह घटना प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के सीधे सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है।
ईटकी में फर्जी म्यूटेशन पर रोक नहीं: ईटकी अंचल के कुंदी मौजा में फर्जी तरीके से जमीन बिक्री और म्यूटेशन रोकने की मांग पर कार्रवाई नहीं होने का मामला भी जनता दरबार में उठा। एक सेवानिवृत्त शिक्षक द्वारा दी गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को शो-कॉज करने का निर्देश दिया। यह मामला राजस्व तंत्र में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को रेखांकित करता है।
रिकॉर्ड छेड़छाड़ और अवैध कब्जाः जनता दरबार में सोनाहातू अंचल के गणेश महतो ने पंजी-2 में कथित छेड़छाड़ की शिकायत की, जिस पर जांच के आदेश दिए गए। वहीं ओरमांझी अंचल के गांगु टोला के ग्रामीणों ने बांध की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत रखी। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लापरवाही अब नहीं चलेगीः उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि भू-माफियाओं की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखें, राजस्व अभिलेखों की नियमित जांच करें और किसी भी अवैध कब्जे की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने दो टूक कहा कि सरकारी जमीन की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
जवाबदेही की ओर बढ़ता प्रशासनः यह कार्रवाई सिर्फ कुछ अधिकारियों को नोटिस देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक प्रशासनिक संदेश है। पहला,जनता दरबार को प्रभावी मंच बनाकर शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने की कोशिश दिखती है। दूसरा, जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। तीसरा, शिक्षा और सामाजिक सेवाओं से जुड़े मामलों में देरी को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
बता दें कि झारखंड जैसे राज्य में जहां भूमि विवाद अक्सर सामाजिक तनाव का कारण बनते हैं, वहां इस तरह की सख्ती प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब शिकायतों पर चुप्पी या देरी महंगी पड़ सकती है।










