
रांची दर्पण डेस्क। रांची और आसपास के इलाकों में लंबे समय से सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन TSPC के सब-जोनल कमांडर विरम राम उर्फ अरविंद जी को गिरफ्तार कर लिया।
यह गिरफ्तारी न केवल एक बड़े उग्रवादी चेहरे को कानून के शिकंजे में लाने का मामला है, बल्कि इससे क्षेत्र में रंगदारी और हिंसक गतिविधियों के नेटवर्क पर भी गहरा असर पड़ने की उम्मीद है।
ऑपरेशन की पूरी कहानीः वरीय पुलिस अधीक्षक रांची को 3 मई 2026 को गुप्त सूचना मिली कि बुढ़मू थाना क्षेत्र में ईंट भट्ठा फायरिंग समेत कई घटनाओं में शामिल उग्रवादी विरम राम लातेहार जिले के चंदवा स्थित धोबी टोला में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष छापामारी दल का गठन किया।
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के निर्देशन और पुलिस उपाधीक्षक खलारी के नेतृत्व में गठित टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से चंदवा में घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा। इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि बिना किसी बड़ी मुठभेड़ के एक वांछित उग्रवादी को गिरफ्तार कर लिया गया।
15 साल का नेटवर्क और कई जिलों में पकड़ः पूछताछ में विरम राम ने स्वीकार किया कि वह पिछले 15 वर्षों से TSPC संगठन से जुड़ा हुआ है। वह बुढ़मू, ठाकुरगांव, पतरातु, खलारी, कांके, केरेडारी, पिपरवार, पिठोरिया, मैक्लुस्कीगंज और रातु जैसे इलाकों में सब-जोनल कमांडर के रूप में सक्रिय था।
उसका मुख्य काम ठेकेदारों, जमीन कारोबारियों, ईंट भट्ठा मालिकों, कोयला व्यवसायियों और क्रशर संचालकों से फोन पर धमकी देकर लेवी वसूलना था। इनकार करने पर फायरिंग और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता था।
बरामदगी से खुला नेटवर्क का तकनीकी पहलूः गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर बुढ़मू थाना क्षेत्र के छापर गांव से पुलिस ने 9 एमएम पिस्टल, एक मैग्जीन, 07 जिंदा गोलियां, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 राउटर सामान बरामद किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राउटर की बरामदगी यह संकेत देती है कि उग्रवादी अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल नेटवर्क का भी उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियां अधिक संगठित और ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस के लिए बड़ी चुनौतीः विरम राम के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी। इससे पहले उसके दस्ता के कई सदस्य पकड़े जा चुके हैं, लेकिन वह लगातार बचता रहा।
नेटवर्क पर शिकंजाः पुलिस ने दावा किया है कि उसके संपर्क में रहने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शेष बचे उग्रवादियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया गया है।
क्या बदलेगा अब? इस गिरफ्तारी को सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह उस समानांतर उग्रवादी अर्थव्यवस्था पर प्रहार है, जो लेवी और डर के सहारे चलती रही है।
हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियां पूरी तरह थम जाएंगी या संगठन नए चेहरों के साथ फिर सक्रिय होने की कोशिश करेगा।
फिलहाल, पुलिस की इस कार्रवाई से रांची-लातेहार बेल्ट में सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बढ़ा है और आम लोगों में राहत की भावना देखी जा रही है।










