
रांची दर्पण डेस्क। पंचायती राज विभाग की पहल के बाद अब पेसा क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों की भूमिका और मजबूत होने जा रही है। राज्य सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों में पंचायतों को अधिक अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
इसके तहत ग्राम पंचायतों को रजिस्टर-2 की अद्यतन प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि वे भूमि विवाद, अवैध कब्जा और जमीन हस्तांतरण जैसे मामलों की सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
जानकारी के अनुसार पंचायती राज विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी ने भू-राजस्व विभाग के सचिव को पत्र भेजकर सभी अंचल अधिकारियों को पंचायतों को रजिस्टर-2 उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
रजिस्टर-2 में जमीन का सरकारी रिकॉर्ड दर्ज रहता है, जिससे पंचायतें यह तय कर सकेंगी कि किस भूमि का वास्तविक मालिक कौन है और कहीं नियमों के विरुद्ध जमीन का हस्तांतरण तो नहीं हुआ है।
पेसा नियमावली के अध्याय-15 में पूर्व में स्थानांतरित भूमि के प्रत्यावर्तन का प्रावधान किया गया है। वहीं पेसा कानून की कंडिका-33 के अनुसार भूमि वापसी से जुड़ी कार्रवाई विल्किंसन रूल और अन्य प्रथागत कानूनों के तहत की जाएगी। ऐसे मामलों में ग्राम पंचायतों के पास जमीन का रिकॉर्ड होना आवश्यक माना गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतें भूमिहीन परिवारों के लिए गृहस्थल चयन, खेती योग्य जमीन उपलब्ध कराने और अवैध कब्जे से भूमि मुक्त कराने जैसे मामलों में स्थानीय स्तर पर निर्णय ले सकेंगी। इससे गांवों में जमीन विवादों के समाधान की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
पंचायती राज निदेशालय ने भू-राजस्व विभाग से अनुरोध किया है कि हर वर्ष के शुरुआती 15 दिनों के भीतर पंचायतों को रजिस्टर-2 की अद्यतन प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए। यह व्यवस्था राज्य के 16 अनुसूचित जिलों के 136 प्रखंडों और 2066 ग्राम पंचायतों में लागू होगी।
इधर छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 की धारा 71(क) के तहत उपायुक्त को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि किसी अनुसूचित जनजाति समुदाय की भूमि का हस्तांतरण धोखाधड़ी या नियमों के उल्लंघन से हुआ हो तो जांच के बाद जमीन मूल रैयत या उसके उत्तराधिकारी को वापस दिलाई जा सके। इसी प्रकार संताल परगना टेनेंसी एक्ट 1949 की धारा 42 के तहत भी अवैध कब्जे वाली कृषि भूमि से बेदखली का आदेश दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पेसा क्षेत्रों में ग्राम सभा आधारित स्वशासी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।










