ओरमांझी फ्लाइओवर फिर शुरू: अनियमितताओं के बीच 45 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल

रांची दर्पण डेस्क। रांची से सटे ओरमांझी ब्लॉक चौक पर लंबे समय से अटकी फ्लाइओवर परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। शुरुआती चरण में भारी अनियमितताओं और एजेंसियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों से घिरी इस योजना में अब दोबारा हलचल दिखाई देने लगी है।
ताजा जानकारी के मुताबिक निर्माण कार्य की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई है और फिलहाल पाइलिंग के लिए तकनीकी परीक्षण जारी है। करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह फ्लाइओवर लगभग 800 मीटर लंबा होगा और रांची-रामगढ़ रोड (NH-33) के ऊपर से गुजरेगा।
इस परियोजना का उद्देश्य इस व्यस्त चौक पर लगने वाले जाम से स्थायी राहत दिलाना है, जहां चारों दिशाओं से आने वाले वाहनों के कारण रोजाना अफरा-तफरी की स्थिति बनी रहती है।
अनियमितताओं की पृष्ठभूमि में क्या बदला, क्या वही है? इस परियोजना की शुरुआत में ही निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों पर नियमों की अनदेखी, गुणवत्ता से समझौता और प्रक्रियागत पारदर्शिता की कमी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। यही कारण था कि काम लंबे समय तक ठप पड़ा रहा।
अब जब दोबारा काम शुरू होने की बात सामने आई है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पहले की गड़बड़ियों से सबक लिया गया है या फिर वही ढर्रा जारी रहेगा?
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि बिना स्पष्ट जवाबदेही तय किए और निगरानी तंत्र को मजबूत किए, परियोजना का पुनः शुरू होना भविष्य में नई समस्याओं को जन्म दे सकता है।
ट्रैफिक समस्या का समाधान या नया सिरदर्द? ओरमांझी चौक की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक प्रबंधन की कमी रही है। यहां न तो प्रभावी सिग्नल सिस्टम है और न ही ट्रैफिक नियंत्रण के पर्याप्त संसाधन। परिणामस्वरूप आए दिन जाम और दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं।
फ्लाइओवर बनने के बाद रांची से आने वाले वाहन सीधे ऊपर से गुजर सकेंगे। रामगढ़ की ओर जाने वाले वाहन भी फ्लाइओवर का उपयोग करेंगे। बोड़ेया और सिकिदरी की ओर जाने वाले वाहन नीचे के मार्ग का उपयोग करेंगे।
यह व्यवस्था सुनने में सुव्यवस्थित लगती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीचे के मार्गों का भी समुचित विकास नहीं हुआ, तो वहां भी भीड़भाड़ बढ़ सकती है।
निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्लान कागज बनाम जमीनः परियोजना के दौरान ट्रैफिक बाधित न हो, इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने डायवर्सन प्लान तैयार किया है। पहले वैकल्पिक मार्ग (डायवर्सन) का निर्माण किया जाएगा, जिसके जरिए वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।
हालांकि पिछले अनुभव बताते हैं कि कई बार ऐसे डायवर्सन खुद जाम और अव्यवस्था का कारण बन जाते हैं। इसलिए इस बार योजना के क्रियान्वयन पर सबकी नजरें टिकी हैं।
डेढ़ साल का लक्ष्य, क्या समयसीमा पूरी होगी? परियोजना को डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन राज्य में कई अधूरी पड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को देखते हुए यह समयसीमा भी सवालों के घेरे में है। यदि काम में पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई तो देरी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
जनता की उम्मीदें और प्रशासन की परीक्षाः ओरमांझी फ्लाइओवर सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की समस्या का संभावित समाधान है। लेकिन अनियमितताओं के साये में इसकी पुनः शुरुआत प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है।
अब देखना यह होगा कि यह परियोजना वाकई ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने वाली साबित होती है या फिर भ्रष्टाचार और लापरवाही की एक और कहानी बनकर रह जाती है।
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