सेवानिवृत मुख्य सचिव अलका तिवारी बनीं झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त

झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त बनने के बाद श्रीमति अलका तिवारी कहा कि अब मेरा उद्देश्य हर मतदाता की आवाज को मजबूत करना होगा। झारखंड की जमीनी हकीकत को समझते हुए हम निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेंगे।

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड की नौकरशाही में एक और ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुईं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्रीमती अलका तिवारी को अब झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है।

यह नियुक्ति झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 66 की उपधारा (2) के तहत की गई है, जो राज्यपाल के आदेश से प्रभावी हो गई। 1988 बैच की इस अधिकारी की यह नियुक्ति न केवल उनकी लंबी प्रशासनिक यात्रा का सम्मान है, बल्कि आगामी पंचायत चुनावों और राज्य की चुनावी प्रक्रिया को नई ऊर्जा देने का वादा भी करती है।

श्रीमती अलका तिवारी उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। नवंबर 2024 में वे झारखंड की तीसरी महिला मुख्य सचिव बनीं, जब निर्वाचन आयोग ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। यह कदम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उठाया गया था, ताकि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी निष्पक्ष और मजबूत बनी रहे। उनकी रिटायरमेंट तिथि 30 सितंबर 2025 थी, लेकिन सेवानिवृत्ति के ठीक बाद ही उन्हें यह नया दायित्व सौंपा गया, जो उनकी क्षमता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में अलका तिवारी चार वर्ष के लिए पदभार संभालेंगी, लेकिन यदि वे 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेती हैं तो उसी तिथि से पद रिक्त हो जाएगा। उनकी सेवा शर्तें राज्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति एवं सेवाशर्त) नियमावली, 2001 (यथा संशोधित) के अनुसार होंगी।

यह नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को आकार देंगे। अलका तिवारी की अगुवाई में राज्य की चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, कुशल और समावेशी हो सकती है। खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जहां मतदाता जागरूकता और लॉजिस्टिक चुनौतियां बनी रहती हैं।

श्रीमती अलका तिवारी की प्रशासनिक यात्रा प्रेरणादायक रही है। 1988 बैच की यह अधिकारी न केवल झारखंड में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कुशलता के लिए जानी जाती हैं। मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने राज्य की विकास योजनाओं को गति दी, विशेषकर स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास क्षेत्रों में।

निर्वाचन आयोग की मंजूरी के साथ उनकी नियुक्ति ने साबित किया कि वे चुनावी संवेदनशीलता को समझने वाली एक मजबूत नेता हैं। पूर्व में विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के रूप में सेवा दे चुकीं श्रीमती तिवारी ने हमेशा सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उनकी यह नई भूमिका झारखंड के लोकतांत्रिक ढांचे को और सशक्त करेगी, जहां पंचायत चुनाव ग्रामीण नेतृत्व को नई दिशा देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलका तिवारी की नियुक्ति से राज्य निर्वाचन विभाग में एक नई गति आएगी। आगामी पंचायत चुनावों में डिजिटल वोटिंग, मतदाता सूची शुद्धिकरण और लिंग समानता जैसे मुद्दों पर उनका फोकस राज्य को मॉडल बना सकता है।

वहीं झारखंड सरकार ने इस नियुक्ति को प्रशासनिक निरंतरता का प्रतीक बताया है। राज्यपाल के आदेश से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है।

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