ओरमाँझीआस-पास

भाजपा नेता हत्याकांड में बड़ा फैसला, सभी सात आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लंबे समय तक झकझोरने वाले भाजपा नेता जीतराम मुंडा हत्याकांड में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है। अपर न्याययुक्त आनंद प्रकाश की अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी सात आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत के इस निर्णय के साथ ही करीब चार साल से चला आ रहा यह आपराधिक मुकदमा कानूनी रूप से समाप्त हो गया।

अदालत से बरी किए गए आरोपियों में एक लाख रुपये का इनामी और मुख्य आरोपी मनोज मुंडा के अलावा डबलू यादव, कार्तिक मुंडा, रतन बेदिया, बलराम साहू उर्फ डेविड, अमन सिंह और राजीव सिंह शामिल हैं। सभी आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुजय दयाल ने पक्ष रखा और अभियोजन की कमजोरियों की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए थे, लेकिन अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत गवाह और साक्ष्य आरोपियों पर लगे गंभीर आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहे। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

अधिवक्ता सुजय दयाल ने बताया कि इस मामले में कुछ आरोपियों के नाम पहले भी चर्चित आपराधिक मामलों से जुड़े रहे हैं। अमन सिंह का नाम धनबाद के डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में सामने आ चुका है, जबकि बलराम साहू उर्फ डेविड का नाम पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड से जुड़ा रहा है। बावजूद इसके, जीतराम मुंडा हत्याकांड में इनके खिलाफ ठोस और निर्णायक साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

गौरतलब है कि 22 मार्च 2021 को ओरमांझी थाना क्षेत्र में एक ढाबा के पास भाजपा नेता जीतराम मुंडा की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था।

मुख्य आरोपी मनोज मुंडा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में मनोज मुंडा जब अदालत में आत्मसमर्पण करने पहुंचा, उसी दौरान पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में ओरमांझी थाना में कांड संख्या 159/2021 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अदालत के इस फैसले के बाद जहां आरोपियों को कानूनी राहत मिली है, वहीं यह निर्णय जांच प्रक्रिया और साक्ष्य संकलन पर भी कई सवाल खड़े करता है। एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता की हत्या के मामले में सभी आरोपियों का बरी होना, आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद सभी आरोपी कानूनी रूप से दोषमुक्त हो गए हैं। अब यह देखना होगा कि इस फैसले के बाद सरकार या अभियोजन पक्ष की ओर से उच्च अदालत में अपील की जाती है या नहीं।

मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.