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ओरमांझी जू में खुशखबरी: दरियाई घोड़े के घर आया नन्हा मेहमान, संख्या 10 हुई

ओरमांझी (रांची दर्पण)। भगवान बिरसा जैविक उद्यान ओरमांझी से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए एक सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। चिड़ियाघर में एक दरियाई घोड़े ने स्वस्थ शावक को जन्म दिया है। इस नए मेहमान के आगमन से उद्यान में दरियाई घोड़ों की कुल संख्या अब बढ़कर 10 हो गई है। यह घटना न केवल जैविक उद्यान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में झारखंड के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दरियाई घोड़ों की जोड़ी लालू और लिली को पूर्व में अलग-अलग चिड़ियाघरों से भगवान बिरसा जैविक उद्यान लाया गया था। इन्हीं की मादा संतान ‘छोटी’ ने हाल ही में इस शावक को जन्म दिया है। शावक पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है और विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी नियमित देखभाल की जा रही है।

यह जन्म इस बात का प्रमाण है कि भगवान बिरसा जैविक उद्यान का प्राकृतिक और संतुलित वातावरण वन्यजीवों के लिए अत्यंत अनुकूल सिद्ध हो रहा है। यहां जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास के अनुरूप माहौल उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनके व्यवहार, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी चिड़ियाघर में वन्यजीवों का सफल प्रजनन उसके प्रबंधन की गुणवत्ता को दर्शाता है। दरियाई घोड़े जैसे बड़े और संवेदनशील जीवों का नियमित रूप से शावक जन्म देना इस बात का संकेत है कि उद्यान प्रशासन द्वारा भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, जलवायु संतुलन और व्यवहारिक समृद्धि पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।

दरियाई घोड़ा, जिसे दुनिया के सबसे भारी स्थलीय स्तनधारियों में गिना जाता है, सामान्यतः शांत दिखने वाला लेकिन बेहद संवेदनशील और शक्तिशाली जीव माना जाता है। ऐसे जीवों के प्रजनन के लिए सुरक्षित जल क्षेत्र, पर्याप्त खुला स्थान और तनावमुक्त वातावरण आवश्यक होता है। भगवान बिरसा जैविक उद्यान में यह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है। लगातार बढ़ती शहरीकरण की प्रक्रिया और प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने के कारण कई प्रजातियां संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे में चिड़ियाघरों की भूमिका केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि वे संरक्षण, प्रजनन और संवर्धन के महत्वपूर्ण केंद्र बन जाते हैं।

भगवान बिरसा जैविक उद्यान पहले भी कई वन्यजीव प्रजातियों के सफल संरक्षण और प्रजनन के लिए जाना जाता रहा है। दरियाई घोड़े की प्रजाति में प्रतिवर्ष शावक का जन्म इस उद्यान की बढ़ती सफलता को और मजबूत करता है। यह उपलब्धि राज्य के वन विभाग और उद्यान प्रशासन के लिए भी गौरव का विषय है।

उद्यान प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी वन्यजीवों के लिए और बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन की यह प्रक्रिया और मजबूत हो सके। नए शावक के आगमन के बाद चिड़ियाघर आने वाले पर्यटकों और बच्चों के बीच भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि यदि वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण और वैज्ञानिक देखभाल मिले तो संरक्षण के प्रयास सफल हो सकते हैं।

Ranchi Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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