JSSC-CGL परीक्षा रद्द होते ही रांची में जश्न, बारिश में झूमे छात्र और लहराया तिरंगा
24 दिन के छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, परीक्षा रद्द होने की खबर मिलते ही आंदोलन स्थल पर खुशी की लहर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि JSSC-CGL परीक्षा रद्द की गयी परीक्षाओं की जगह नई परीक्षाएं कब और किस व्यवस्था के तहत होंगी? साथ ही जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा….
रांची दर्पण डेस्क। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन को सोमवार देर रात उस वक्त बड़ा मोड़ मिला, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। सरकार ने TDPL के जरिए आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने और वर्ष 2014 से हुई परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की व्यापक जांच की बात कही।
घोषणा की खबर जैसे ही रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पर पहुंची, वहां का माहौल अचानक बदल गया। कई दिनों से सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे अभ्यर्थी बारिश के बीच तिरंगा लेकर झूमने लगे। कहीं अबीर-गुलाल उड़ रहा था तो कहीं छात्र एक-दूसरे को रंग लगाकर अपनी खुशी का इजहार कर रहे थे।
वार्ता का इंतजार, फिर सीधे मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला
सोमवार को आंदोलनरत छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच दोपहर दो बजे प्रस्तावित वार्ता होनी थी। लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा प्रोजेक्ट भवन में मंत्रियों की बैठक बुलाए जाने के कारण बातचीत टल गयी।
इसके बाद छात्र देर शाम तक सरकार के फैसले का इंतजार करते रहे। रात करीब साढ़े नौ बजे मुख्यमंत्री की ओर से परीक्षा रद्द करने की घोषणा होते ही आंदोलन स्थल पर खुशी की लहर दौड़ गयी।
यह वही आंदोलन था, जिसमें छात्र पिछले कई दिनों से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर डटे थे।
तेज बारिश भी नहीं रोक सकी जश्न
परीक्षा रद्द होने की सूचना मिलते ही हॉस्टल और आसपास के इलाकों से विद्यार्थी आंदोलन स्थल की ओर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में स्टेडियम परिसर में छात्रों की भीड़ बढ़ गयी।
तेज बारिश के बीच कई छात्रों ने हाथों में तिरंगा थाम लिया। नारे लगे, ढोल की थाप पर छात्र नाचे और एक-दूसरे के चेहरे पर गुलाल लगाया। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस राहत ने कई छात्रों को भावुक भी कर दिया। खुशी के बीच कुछ अभ्यर्थियों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
छात्रों का कहना था कि यह केवल एक परीक्षा रद्द होने की खुशी नहीं है, बल्कि लंबे समय से उठायी जा रही निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग की एक बड़ी जीत है।
सरकार के समर्थन में लगे नारे
आंदोलन स्थल का सबसे दिलचस्प दृश्य यह रहा कि जो छात्र कुछ दिन पहले तक सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे, वही देर रात सरकार के फैसले के समर्थन में नारे लगाते नजर आये।
हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी साफ किया कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। विशेष रूप से सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक वर्ग अब भी संतुष्ट नहीं है।
15 दिन के अनशन के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो लंबे समय से अनशन पर थे। सरकार के फैसले के बाद मंगलवार को मंत्री इरफान अंसारी और दीपिका पांडेय ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
अनशन खत्म करने के बाद महतो ने कहा कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना था कि झारखंड की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
उनके अनुसार लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें युवाओं को अपने अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन करने की जरूरत न पड़े और सरकारी भर्तियां निष्पक्ष तरीके से हों।
रिफॉर्म मंच ने कहा- अभी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि 11वीं-13वीं JPSC से जुड़े मुद्दों और सीबीआई जांच पर अभी स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए आंदोलन को आगे किस रूप में जारी रखा जाए, इस पर कोर कमेटी की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
यानी JSSC-CGL रद्द होने के बाद आंदोलन के एक बड़े अध्याय का पटाक्षेप जरूर हुआ है, लेकिन छात्रों की पूरी लड़ाई अभी समाप्त नहीं मानी जा रही।
23 दिन के आंदोलन ने बदली तस्वीर
इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह रही कि आंदोलन धीरे-धीरे JSSC-CGL से आगे बढ़कर झारखंड की भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बन गया।
21 जुलाई से शुरू हुई जांच, JPSC कार्यालय में CID की कार्रवाई, अधिकारियों और एजेंसी से जुड़े लोगों से पूछताछ तथा गिरफ्तारियों के बाद मामला लगातार गंभीर होता गया। इसी बीच छात्रों का आंदोलन तेज होता गया।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुए टकराव के बाद आंदोलन और सरकार के बीच तनाव बढ़ा, लेकिन इसके बाद वार्ता का सिलसिला भी शुरू हुआ। 17 अगस्त को JSSC कार्यालय में CID की कार्रवाई और मुख्यमंत्री की आपात कैबिनेट बैठक के बाद देर रात सरकार का बड़ा फैसला सामने आया।
सरकार के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गयी परीक्षाओं की जगह नई परीक्षाएं कब और किस व्यवस्था के तहत होंगी? साथ ही जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
एक परीक्षा रद्द, लेकिन असली परीक्षा अब सरकार की
JSSC-CGL रद्द करने के फैसले ने आंदोलनरत छात्रों को तत्काल राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ सरकार के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी भी खड़ी हो गयी है।
अब अभ्यर्थियों की नजर नई भर्ती प्रक्रिया, जांच की निष्पक्षता और भविष्य की परीक्षाओं के संचालन पर होगी। सरकार ने भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया है।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बारिश के बीच तिरंगे के साथ झूमते छात्रों की तस्वीर इस आंदोलन के एक यादगार क्षण के रूप में सामने आयी है। लेकिन इस जश्न के पीछे एक बड़ा संदेश भी है कि सरकारी भर्ती में भरोसा केवल परीक्षा कराने से नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने से कायम होगा।
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