
सिल्ली/रांची (रांची दर्पण)। सिल्ली थाना क्षेत्र के पतराहातु गांव के एक आइटीआइ छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतक की पहचान 22 वर्षीय नीतीश प्रमाणिक के रूप में हुई है, जो आइटीआइ का छात्र था।
बताया जा रहा है कि उसने देर रात रांची के गढ़ाटोली शांतिनगर स्थित अपने किराये के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि युवक ने कथित तौर पर पूरी घटना को ग्रुप वीडियो कॉल पर लाइव दिखाया, जिसकी फुटेज अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
जानकारी के अनुसार नीतीश प्रमाणिक सिल्ली थाना क्षेत्र के पतराहातु गांव निवासी भृगु प्रमाणिक का पुत्र था। वह रांची में अपने जीजा के घर रहकर आइटीआइ की पढ़ाई कर रहा था और साथ ही पार्ट टाइम नौकरी भी करता था। सोमवार को घर में कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इसी दौरान उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक घटना के समय नीतीश ने एक ग्रुप वीडियो कॉल किया था, जिसमें उसकी कथित प्रेमिका, एक अन्य युवती और उसका एक दोस्त जुड़े हुए थे। वायरल वीडियो में युवक को मानसिक रूप से परेशान और भावुक अवस्था में देखा जा रहा है। आरोप है कि कॉल पर मौजूद लोगों ने उसे समझाने के बजाय उकसाने जैसी बातें कीं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
घटना के बाद वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से फैल गयी। बताया जाता है कि यह वीडियो नीतीश के पिता के एक परिचित तक भी पहुंचा, जिसके बाद परिवार और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
घटना के बाद को बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन सिल्ली थाना पहुंचे और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मृतक के पिता भृगु प्रमाणिक ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और वीडियो कॉल के जरिये उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच करायी जाये तो घटना की सच्चाई सामने आ सकती है। इलाके के लोगों ने इसे सोशल मीडिया और डिजिटल दबाव का खतरनाक उदाहरण बताया है।
सिल्ली थाना प्रभारी नवीन कुमार के अनुसार घटना रांची के सदर थाना क्षेत्र में हुई है, इसलिए जांच वहीं की पुलिस कर रही है। इस कारण सिल्ली थाना में अलग से मामला दर्ज नहीं किया गया है।
दूसरी ओर सदर थाना पुलिस ने बताया कि शुरुआती तौर पर यूडी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है। पुलिस का कहना है कि अभी तक परिजनों की ओर से वायरल वीडियो की कॉपी उपलब्ध नहीं करायी गयी है। वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
बहरहाल यह घटना एक बार फिर युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, ऑनलाइन रिश्तों और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनात्मक तनाव में युवा कई बार सोशल मीडिया या वीडियो कॉल के जरिये अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं, लेकिन समय रहते उन्हें सही मानसिक सहयोग नहीं मिल पाता।










