पंडरा ओपी थाना में तोड़फोड़, पुलिस पर हमला, ओपी प्रभारी गंभीर

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के पंडरा ओपी थाना इलाके में एक दुखद हादसे हिंसक रूप ले लिया। एक कॉलेज छात्र की मौत के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने पर हमला बोल दिया। ट्रेलर की टक्कर से घायल हुए संजय गांधी मेमोरियल कॉलेज के छात्र उत्तम रजक (25 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत हो जाने से भड़के आक्रोश ने सड़कों को जाम कर दिया और थाने में तोड़फोड़ मचाई। इस दौरान पंडरा ओपी प्रभारी मनीष कुमार पर भी जानलेवा हमला हुआ।

इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां पुलिस को खुद अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा। घटना के बाद दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई बाइकों को जब्त कर आरोपियों की तलाश जारी है।

घटना की शुरुआत 14 सितंबर की रात से हुई, जब पंडरा पुल के समीप एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने उत्तम रजक को जोरदार टक्कर मार दी। गुमला जिले के चैनपुर निवासी उत्तम रांची में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रहा था। हादसे में गंभीर रूप से घायल उत्तम को पहले सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई। बाद में उसे बरियातू स्थित एक अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां रविवार को उसने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग सदमे में आ गए और सड़क पर उतर आए।

मृतक के शव को लेकर परिजन पंडरा ओपी के बाहर पहुंचे और ट्रेलर चालक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सड़क जाम कर दी। आक्रोश इतना बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। परिजनों का आरोप था कि हादसे के बाद वे कई बार थाने गए, लेकिन पुलिस ने हर बार टालमटोल कर मामला टाल दिया। मृतक की बड़ी मां मीना देवी ने रोते हुए कहा कि हमारी सुनवाई नहीं हुई, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।  उनकी मौसी सरस्वती देवी ने भी यही दर्द बयां किया कि शव का दाह संस्कार तभी होगा, जब पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।

स्थिति तब और बेकाबू हो गई, जब कुछ आक्रोशित लोग थाने के अंदर घुस गए। उन्होंने वहां रखे फर्नीचर, गमलों और अन्य सामानों में जमकर तोड़फोड़ की। फाइलें और केस रिकॉर्ड्स को उठाकर फेंक दिया गया, जिससे थाने का माहौल युद्ध क्षेत्र जैसा हो गया। ओपी प्रभारी मनीष कुमार ने तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन समय पर अतिरिक्त पुलिस बल नहीं पहुंचा। इस बीच कोतवाली डीएसपी सहित रातू, गोंदा, सुखदेवनगर और पुंदाग थानों के प्रभारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की।

लेकिन समझाने की बजाय स्थिति और खराब हो गई। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और अचानक ओपी प्रभारी मनीष कुमार पर हमला बोल दिया। हमले में उन्हें सिर पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बहा। बीच-बचाव करने आए जवानों के साथ भी मारपीट की गई। आनन-फानन में घायल प्रभारी को ऑर्किड अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके सिर में आठ टांके लगाए। हेहल सीओ धनश्याम कुंवर भी मौके पर पहुंचे और पुलिस के सहयोग से परिजनों को 15 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की गई। आगे की कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को परिजनों के हवाले किया गया।

मुआवजा राशि से असंतुष्ट होकर कुछ लोगों ने फिर से हंगामा किया, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति पर काबू पाया। रात करीब नौ बजे मामला शांत हुआ, लेकिन तब तक दोनों ओर की सड़कें घंटों जाम रहीं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हुई। पुलिस ने घटना के बाद दो लोगों को हिरासत में लिया है और उनकी संलिप्तता की जांच कर रही है। साथ ही घटनास्थल से जब्त की गई कई बाइकों के नंबरों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।

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