राँची DC और कांके CO से ग्रामीणों की गुहार, इस तबाही से बचाईए सरकार

रांची दर्पण संवाददाता / आमोद। रांची जिले के कांके अंचल के अंतर्गत नेवरी विकास केन्दुआ टोली में एक गंभीर संकट ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। कांके रिंग रोड के किनारे की जमीन, जो जल निकासी के लिए महत्वपूर्ण है, पर जमीन कारोबारियों द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है और उसकी घेराबंदी की जा रही है। यह अतिक्रमण न केवल अवैध जमीन हस्तांतरण का मामला उठाता है, बल्कि बाढ़, फसल नुकसान और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने का गंभीर खतरा भी पैदा करता है। ग्रामीण इस स्थिति से भयभीत हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लगभग 2 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली यह जमीन एक महत्वपूर्ण जल निकासी प्रणाली का हिस्सा है, जो खासकर बरसात के मौसम में तेज धार वाले पानी को गांव से बाहर निकालती है। साल भर इस प्रणाली के माध्यम से पानी की निकासी होती है, जिसके लिए एक पुलिया का निर्माण किया गया है। लेकिन अब इस जमीन की घेराबंदी के कारण यह जल मार्ग अवरुद्ध होने का खतरा है। यदि भारी बारिश हुई तो क्या होगा? ग्रामीणों का डर है कि जल निकासी रुकने से आसपास के इलाकों में जल-जमाव हो जाएगा। जिससे घर, सड़कें और खेत जलमग्न हो सकते हैं। रिंग रोड के दूसरी ओर का इलाका काफी नीचा है, जिससे इस क्षेत्र में बाढ़ का खतरा और भी गंभीर हो जाता है।

कांके क्षेत्र अपनी उपजाऊ जमीन के लिए जाना जाता है, जहां धान की खेती ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है। जल निकासी प्रणाली के अवरुद्ध होने से खेतों में जल-जमाव की स्थिति बन सकती है, जिससे खेती करना असंभव हो जाएगा। यदि बारिश अधिक हुई तो पूरी फसल डूब सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। जल निकासी प्रणाली खेती के लिए काफी महत्वपूर्ण है?  क्योंकि यह प्रणाली सिंचाई और जल निकासी के बीच संतुलन बनाए रखती है, जो धान की खेती के लिए आवश्यक है। ग्रामीणों का डर जायज है, क्योंकि उनकी आजीविका और खाद्य सुरक्षा खतरे में है।

इस विवाद का केंद्र एक संदिग्ध जमीन सौदा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह जमीन मूल रूप से एक आदिवासी रैयत की थी, जिसे छोटानागपुर टेनेंसी (सीएनटी) एक्ट के तहत संरक्षित किया गया था। यह एक्ट आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने पर रोक लगाता है। लेकिन एक सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) कर्मचारी, जो स्वयं आदिवासी है, ने इस एक्ट का उल्लंघन करते हुए इस जमीन को खरीदा और बाद में इसे एक प्रभावशाली सामान्य वर्ग के जमीन कारोबारी को सौंप दिया। इस जमीन पर एक शराब की दुकान का भी संचालन हो रहा है, जो ग्रामीणों की चिंताओं को और बढ़ाता है। ऐसी जमीन पर शराब की दुकान क्यों बनाई गई? यह इस सौदे के पीछे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

सीएनटी एक्ट का उल्लंघन एक गंभीर मुद्दा है। यह एक्ट आदिवासी समुदाय के जमीन अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया था, ताकि उनकी जमीन का शोषण न हो। इस मामले में इसका कथित उल्लंघन क्षेत्र में अवैध जमीन हस्तांतरण की व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है। ऐसा उल्लंघन कैसे संभव हुआ और यह आदिवासी समुदाय के अधिकारों को कैसे प्रभावित करता है? एक सीसीएल कर्मचारी और एक जमीन कारोबारी की संलिप्तता शक्ति और प्रभाव के जटिल जाल को दर्शाती है। ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन कानून का पालन करेगा और उनके हितों की रक्षा करेगा? क्या यह मामला भविष्य में इस तरह के अतिक्रमणों के लिए एक मिसाल कायम करेगा?

इस अतिक्रमण के खतरों से भयभीत ग्रामीणों ने कांके अंचलाधिकारी और रांची उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वे इस अवैध घेराबंदी को तुरंत रोकने और जल निकासी प्रणाली को बहाल करने की अपील कर रहे हैं, ताकि संभावित आपदा से बचा जा सके। प्रशासन को जमीन सौदे की जांच करनी चाहिए, सीएनटी एक्ट लागू करना चाहिए, या जन सुरक्षा को प्राथमिकता देकर जल निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए। ग्रामीणों की यह मांग उनकी हताशा को दर्शाती है, जो अपने घरों, फसलों और समुदाय को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कांके की यह स्थिति विकास, जमीन अधिकारों और समुदाय के कल्याण से जुड़े व्यापक सवाल उठाती है। प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन ऐसी संकटों को रोकने और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में क्या भूमिका निभा सकता है। नेवरी विकास केन्दुआ टोली के निवासी जवाबों का इंतजार कर रहे हैं, उम्मीद करते हुए कि प्रशासन त्वरित कार्रवाई करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

जुड़ी खबरें

प्रमुख खबरें

सर्वजन खबरें