अतिक्रमण और गंभीर आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है एचइसी

रांची दर्पण डेस्क। गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे एचइसी की स्थिति अत्यंत खराब हो गयी है। एचइसी द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय संकट के कारण उत्पादन और बिक्री प्रभावित होने की बात कही गयी है। जिसमें औद्योगिक संबंध की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण होने के अलावा पुरानी मशीनरी के बार-बार खराब होने से ऑर्डर के निष्पादन पर असर बताया गया है। वहीं जिसका अप्रत्यक्ष असर नकदी प्रवाह चक्र पर पड़ने की बात कही गयी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्तीय संकट कि स्थिति इस हद तक गंभीर हो गयी कि फंड संकट पैदा हो गया है। एचइसी वैधानिक भुगतान सहित अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इससे एचइसी को पहले से मिले ऑर्डरों के क्रियान्वयन पर गहरा असर पड़ा है।

एचइसी में चल रही वित्तीय समस्या को देखते हुए ग्राहक एचइसी को ऑर्डर देने से बच रहे हैं। एचइसी की नकारात्मक निवल संपत्ति (देनदारी या कर्ज) और नकारात्मक कार्यशील पूंजी के कारण

एचइसी टर्नकी परियोजनाओं के ऑर्डर प्राप्त करने के लिए उच्च मूल्य निविदाओं में भी भाग नहीं ले पा रहा है। कंपनी चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में 226.99 करोड़ रुपये के घाटे में रहा है।

मालूम हो कि कंपनी वर्ष वित्तीय वर्ष 2018-19 से लगातार घाटे में है। वर्ष 2023-24 में एचइसी का घाटा 275.19 करोड़, वर्ष 2022-23 में में घाटा 230.85 करोड़, वर्ष 2021-22 में 256.07 करोड़, वर्ष 2020-21 में 175.78 करोड़, वर्ष 2019-20 में 405.37 करोड़ व वर्ष 2018-19 में 93.67 करोड़ रुपये के घाटे में रहा है।

हालांकि एचइसी अधिकारी का मानना है कि हालांकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में एचइसी का घाटा पिछले वित्तीय वर्ष से कम हुआ है। एचइसी ने वार्षिक रिपोर्ट में 73.05 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी दी है। जो पिछले चार वित्तीय वर्ष से नहीं बदला है। जबकि प्रत्येक दिन आवासीय परिसर में अवैध निर्माण किया जा रहा है। इसको लेकर लोग लिखित शिकायत भी करते है और प्रबंधन द्वारा कहीं कहीं कार्रवाई भी की जाती है।

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