ओरमांझी सीलबंद शराब फैक्ट्री से CCTV DVR गायब, बिहार के पूर्व MLC पर FIR
उकरीद स्थित तरंगिनी लिकर्स की दोबारा जांच में टूटे मिले कई ताले, ब्लेंडिंग कुंड खाली और परिसर में बिखरी मिली सामग्री; पुलिस ने शुरू की जांच

ओरमांझी सीलबंद फैक्ट्री के भीतर टूटे ताले और गायब CCTV DVR ने पुराने शराब प्रकरण को एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ दे दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह महज चोरी की घटना थी या सीलबंद परिसर में मौजूद संभावित साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई सुनियोजित कोशिश….
ओरमांझी (रांची दर्पण)। ओरमांझी के उकरीद स्थित मेसर्स तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड की सीलबंद शराब फैक्ट्री में ताले टूटे मिलने और CCTV का DVR गायब पाए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।
उत्पाद विभाग की शिकायत पर पुलिस ने फैक्ट्री के निदेशक और बिहार के पूर्व MLC सुबोध कुमार समेत अन्य के खिलाफ चोरी और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
मामले में अवर निरीक्षक उत्पाद सदर-01 अंचल रांची सह प्रभारी उत्पाद पदाधिकारी रूपेश कुमार ने 18 अगस्त को ओरमांझी थाने में शिकायत दी। प्राथमिकी के अनुसार 17 अगस्त को रांची उपायुक्त के निर्देश पर फैक्ट्री की दोबारा जांच के लिए दंडाधिकारी मो. जफर हसनात के नेतृत्व में उत्पाद विभाग और ओरमांझी पुलिस की टीम पहुंची थी।
जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य
जांच टीम को मुख्यद्वार के पास स्थित गोदाम के उत्तर-पश्चिम हिस्से में ब्लेंडिंग हॉल का शटर बंद मिला, लेकिन उसका फिट खुला हुआ था। सबसे अहम बात यह रही कि शटर पर लगाया गया सीलबंद ताला वहां नहीं मिला।
बॉटलिंग और कार्यालय के बीच स्थित दरवाजे का सीलबंद ताला टूटा हुआ था। लेबोरेटरी रूम तथा रेडिको खेतान लिमिटेड के कार्यालय के लॉक भी टूटे मिले। इसके अलावा फैक्ट्री में लगा CCTV DVR गायब पाया गया। अधिकारियों के लिए यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से सीलबंद परिसर में आवाजाही और संभावित छेड़छाड़ की कड़ियों का पता चल सकता था।
जांच के दौरान ब्लेंडिंग कुंडों का भौतिक सत्यापन किया गया तो सभी कुंड खाली मिले। परिसर में कुछ सामग्री और तैयार शराब की बोतलों की पेटियां भी बिखरी हुई मिलीं।
30 जून की कार्रवाई से जुड़ा है पूरा मामला
तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड का यह प्लांट रेडिको खेतान लिमिटेड के साथ टाई-अप के तहत विदेशी शराब के निर्माण से जुड़ा है। उत्पाद विभाग ने 30 जून की रात की कार्रवाई में यहां औचक निरीक्षण कर कथित अनियमितताओं और अवैध शराब की बरामदगी के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया था।
इसके बाद पूर्व MLC सुबोध कुमार समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उपलब्ध पूर्व रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने फैक्ट्री से जुड़े दस्तावेजों और अवैध शराब की सप्लाई की दिशा में भी जांच शुरू की थी।
अब सवाल यह है कि जब फैक्ट्री प्रशासनिक रूप से सीलबंद थी, तो अंदर प्रवेश किसने किया? सील किसने तोड़ी और CCTV DVR कहां गया?
पुलिस के सामने अब ये बड़े सवाल
ओरमांझी पुलिस अब सीलबंद परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान, टूटे तालों की परिस्थितियों, गायब DVR और परिसर में मौजूद शराब एवं अन्य सामग्री की स्थिति की जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि सील टूटने के बाद किसी सामग्री को हटाया, बदला या नष्ट किया गया या नहीं।
प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, सीलबंद फैक्ट्री के भीतर टूटे ताले और गायब CCTV DVR ने पुराने शराब प्रकरण को एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ दे दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह महज चोरी की घटना थी या सीलबंद परिसर में मौजूद संभावित साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई सुनियोजित कोशिश।










