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तिरंगा यात्रा से क्यों रोका?  अस्पताल में देवेंद्र महतो की पिटाई पर बवाल, जयराम महतो ने पूछा- यह कैसी आजादी?

देवेंद्र महतो के अस्पताल से निकलकर तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश के दौरान बढ़ा विवाद। पूरे मामले के प्रशासनिक आधार से हेमंत सरकार पर उठे सवाल।

देवेंद्र नाथ महतो के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच, मेडिकल रिपोर्ट और प्रशासन-पुलिस के पक्ष के सामने आने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में उनके रोकने और धक्का-मुक्की के दौरान चोट लगने का दावा सामने आया है, जबकि प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन स्वतंत्रता दिवस के दिन एक बार फिर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव का केंद्र बन गया। आमरण अनशन पर चल रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को सदर अस्पताल से निकलकर तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोके जाने के दौरान पुलिसकर्मियों और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई। देवेंद्र महतो ने इस दौरान चोट लगने का दावा किया है।

घटना ऐसे समय हुई, जब आंदोलनकारी छात्रों ने 15 अगस्त को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और समर्थक इसमें शामिल हुए। हालांकि, पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर चल रहे देवेंद्र नाथ महतो इस यात्रा में शामिल नहीं हो सके।

अस्पताल से निकलने की कोशिश पर बढ़ा विवादः 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देवेंद्र नाथ महतो 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद सदर अस्पताल में भर्ती हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार वे करीब 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।

स्वतंत्रता दिवस के दिन उन्होंने अस्पताल से निकलकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश की। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देवेंद्र महतो और सुरक्षा कर्मियों के बीच बहस तथा रास्ता रोकने की स्थिति दिखाई देती है। इसके बाद धक्का-मुक्की हुई।

देवेंद्र महतो ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके सीने में चोट लगी है और उनका इलाज एवं मेडिकल जांच चल रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आई है।

आखिर किस आदेश के तहत रोका गया?

इस घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल यही है कि अस्पताल में भर्ती एक आंदोलनकारी को तिरंगा यात्रा में जाने से रोकने का प्रशासनिक आधार क्या था?

देवेंद्र महतो ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि यदि डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से बाहर जाने से मना किया था तो उसका लिखित आदेश दिखाया जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि बिना लिखित आधार के उन्हें रोका गया है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और अस्पताल की सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। इसलिए इस विवाद का स्पष्ट समाधान तभी संभव है, जब यह सार्वजनिक किया जाए कि देवेंद्र महतो को रोकने का निर्णय किस आदेश, चिकित्सकीय सलाह या कानून-व्यवस्था संबंधी आकलन के आधार पर लिया गया था।

22वें दिन भी जारी रहा छात्र आंदोलनः

JPSC-JSSC से जुड़ी मांगों को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन 15 अगस्त को 22वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार आंदोलनकारी CBI अथवा झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से जांच की मांग भी कर रहे हैं।

रांची दर्पण ने भी 14 अगस्त को आंदोलनकारियों की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा और कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों की जानकारी प्रकाशित की थी। इससे स्पष्ट है कि 15 अगस्त का कार्यक्रम पहले से आंदोलन के एजेंडे में शामिल था।

सरकार की ओर से बातचीत का संकेतः

उधर, 15 अगस्त को ही राज्य सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए बातचीत की संभावना जताई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की मांगों को लेकर गंभीर है और अगले कुछ दिनों में बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद है। उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

यानी एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करने का संकेत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक को तिरंगा यात्रा में जाने से रोकने की घटना ने विवाद को और राजनीतिक बना दिया है।

जयराम महतो ने सदन में मामला उठाने की बात कहीः

इस पूरे घटनाक्रम पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो की ओर से सरकार से जवाब मांगने की बात कही गई है। पार्टी की ओर से देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा फहराने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोके जाने तथा कथित धक्का-मुक्की के मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात सामने आई है।

यदि यह मामला विधानसभा तक पहुंचता है तो सरकार के सामने दो महत्वपूर्ण सवाल होंगे। पहला, देवेंद्र महतो को रोकने का आधिकारिक आधार क्या था और दूसरा, अस्पताल परिसर में हुई कथित धक्का-मुक्की की जिम्मेदारी किसकी थी?

भर्ती विवाद से आगे बढ़ा आंदोलनः

JPSC-JSSC का मौजूदा आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक परिणाम का विवाद नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में नियुक्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्र संगठनों के आंदोलन लगातार राजनीतिक मुद्दा बनते रहे हैं। देवेंद्र नाथ महतो भी लंबे समय से छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े रहे हैं।

अब 15 अगस्त की घटना ने आंदोलन को एक नया आयाम दे दिया है। एक ओर अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, दूसरी ओर प्रशासन के सामने आंदोलन को नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।

टकराव या संवाद? असल सवालः

स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई इस घटना ने स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक अधिकार, प्रशासनिक नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी आंदोलन को कानून के दायरे में रहना चाहिए और हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई का आधार भी पारदर्शी होना चाहिए, खासकर तब जब मामला किसी अस्पताल में भर्ती आंदोलनकारी और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का हो।

देवेंद्र नाथ महतो के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच, मेडिकल रिपोर्ट और प्रशासन-पुलिस के पक्ष के सामने आने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में उनके रोकने और धक्का-मुक्की के दौरान चोट लगने का दावा सामने आया है, जबकि प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

JPSC-JSSC आंदोलन की अगली दिशा अब दो मोर्चों पर तय होती दिख रही है। सड़क पर जारी छात्र आंदोलन और विधानसभा में उठने वाले सवाल। सरकार यदि भर्ती संबंधी आरोपों का तथ्यात्मक जवाब, जांच की स्थिति और 15 अगस्त की कार्रवाई का स्पष्ट आधार सामने रखती है तो मौजूदा गतिरोध को बातचीत की दिशा मिल सकती है। अन्यथा तिरंगा यात्रा से जुड़ा यह विवाद आंदोलन को और राजनीतिक धार दे सकता है।

Ranchi Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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