हादसा

झारखंड पुलिस मुख्यालय में धधकी आग, कई कंप्यूटर डेटा का किला खाक

रांची (रांची दर्पण न्यूज)। राजधानी रांची में धुर्वा स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय के डेटा सेंटर में  देर रात अचानक भड़की आग ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों पर सवाल खड़े कर रही है।

खबर है कि आग की लपटों ने डेवलपमेंट सेक्शन को अपनी चपेट में ले लिया, जहां 13 से अधिक कंप्यूटर और अनगिनत महत्वपूर्ण कागजात जलकर राख हो गए। यह घटना न सिर्फ पुलिस के डिजिटल कार्यों को ठप कर रही है, बल्कि यह भी संकेत दे रही है कि आधुनिक पुलिसिंग का आधारभूत ढांचा कितना नाजुक हो चुका है।

कल्पना कीजिए, रात के करीब 11 बजे का समय। धुर्वा का पुलिस मुख्यालय, जहां दिनभर अपराधियों की निगरानी से लेकर वेबसाइट अपडेट तक के महत्वपूर्ण कार्य चलते हैं, अचानक धुंए और चीख-पुकार से गूंज उठता है। डेटा सेंटर के डेवलपमेंट सेक्शन में रखे हाई-टेक कंप्यूटरों से निकली चिंगारियां तेजी से फैल गईं।

शुरुआती आग ने न सिर्फ हार्डवेयर को नष्ट किया, बल्कि वर्षों के डिजिटल रिकॉर्ड्स और कागजी दस्तावेजों को भी लील लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेज थी कि सेक्शन के अंदर का तापमान कुछ ही मिनटों में असहनीय हो गया।

पुलिस मुख्यालय के गार्ड्स और डेटा सेंटर के कुछ कर्मचारी, जो रात की शिफ्ट पर तैनात थे, ने फौरन अलार्म बजाया। लेकिन तब तक आग ने 13 से अधिक कंप्यूटरों को अपनी चपेट में ले लिया था। इनमें से कई मशीनें मुख्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के रखरखाव, डेटा एनालिसिस और पुलिसिंग सॉफ्टवेयर के डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल होती थीं।

सूत्रों की मानें तो आग के कारण नेटवर्क सर्वर भी प्रभावित हुए हैं, जिससे पुलिस की ऑनलाइन सेवाएं जैसे FIR दर्ज कराना या अपराध रिकॉर्ड चेक करना कुछ दिनों के लिए बाधित हो सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही रांची फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। सौभाग्य से आग डेटा सेंटर के पहले तल तक ही सीमित रही। अगर यह ऊपरी मंजिलों तक पहुंच जाती, तो नुकसान का आकार कई गुना बढ़ जाता।

बता दें कि झारखंड पुलिस मुख्यालय के डेटा सेंटर का डेवलपमेंट सेक्शन राज्य पुलिस के डिजिटल हृदय के रूप में जाना जाता है। यहां न सिर्फ मुख्यालय की वेबसाइट पर समाचार, अपडेट्स और पब्लिक नोटिफिकेशन अपलोड किए जाते हैं, बल्कि अपराध डेटाबेस, सर्विलांस सॉफ्टवेयर और साइबर क्राइम ट्रैकिंग सिस्टम का भी रखरखाव होता है।

आग से नष्ट हुए कंप्यूटरों में संग्रहीत डेटा का बैकअप लिया गया था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैकअप सर्वर प्रभावित हुए हैं, तो पुलिस को डेटा रिकवरी में हफ्तों लग सकते हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सेक्शन हमारी साइबर सिक्योरिटी का मजबूत किला था। अब जब तक नए सिस्टम इंस्टॉल न हों, कई ऑपरेशन प्रभावित रहेंगे। कल्पना करें अगर कोई साइबर अटैक इसी बीच होता तो नुकसान और भयानक हो जाता।

इसके अलावा सेक्शन में रखे कागजातों में पुलिस की गोपनीय फाइलें, प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स और पुराने रिकॉर्ड शामिल थे, जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। यह घटना पुलिस के ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ मिशन को झटका देगी, जो केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है।

वहीं झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और आईजी माइकल राज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की पुष्टि की और कहा कि आग डेटा सेंटर के पहले तल पर लगी थी और अब पूरी तरह नियंत्रण में है। नुकसान का आकलन चल रहा है, जिसमें करीब 50 लाख रुपये का अनुमानित नुकसान हो सकता है।

आईजी राज ने जोर देकर कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा लगता है। संभवतः शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के कारण, लेकिन पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है।

पुलिस मुख्यालय ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को बुलाया है, जो आग के स्रोत का पता लगाएंगे। क्या यह लापरवाही थी, जैसे ओवरलोडेड वायरिंग या पुराने उपकरण? या फिर कोई साजिश, जैसे साइबर हमले का हिस्सा? सवालों का सिलसिला लंबा है।

आईजी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कर्मचारी हो या ठेकेदार, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमारी प्राथमिकता पुलिसिंग को पटरी पर लाना है। साथ ही मुख्यालय ने तत्काल नए कंप्यूटर और बैकअप सिस्टम की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि सेवाएं जल्द बहाल हो सकें।

बहरहाल, यह घटना झारखंड पुलिस के लिए एक सबक है। राज्य में बढ़ते साइबर क्राइम के बीच पुलिस का अपना डेटा सेंटर सुरक्षित न रहना विडंबना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत है। स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और रेगुलर ऑडिट अनिवार्य होने चाहिए।

Ranchi Darpan

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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