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रांची मेयर चुनाव: गैर-दलीय लड़ाई में भी पार्टीगत इन दावेदारों की होड़ ने बढ़ाई सरगर्मी

रांची दर्पण डेस्क। रांची नगर निगम के आगामी चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर लड़े जाने वाले हों, लेकिन राजनीतिक दलों में हलचल इतनी तेज हो गई है कि लगता है जैसे कोई बड़ा विधानसभा चुनाव होने वाला है। पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारियां पेश करने में जुटे हुए हैं और इस बार मेयर की सीट आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित होने से प्रतिस्पर्धा और भी रोचक बन गई है।

रांची दर्पण की टीम ने विभिन्न दलों के नेताओं से बातचीत की और पता चला कि भाजपा में सबसे ज्यादा 8 दावेदार मैदान में हैं, जबकि झामुमो में 3 और कांग्रेस में 1 प्रमुख नाम उभरकर सामने आया है। क्या इंडिया गठबंधन के दल एकजुट होकर लड़ेंगे या अलग-अलग? यह सवाल अभी भी अनसुलझा है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

रांची झारखंड की राजधानी होने के नाते मेयर की कुर्सी हमेशा से ‘हॉट सीट’ रही है। पिछले तीन चुनावों में यह सीट आदिवासी महिलाओं के लिए आरक्षित थी और इस बार यह आदिवासी स्त्री-पुरुष दोनों के लिए खुली है।

इतिहास गवाह है कि पहली मेयर रमा खलखो बनीं, जो बंधु तिर्की की पार्टी झारखंड जनाधिकार मंच के समर्थन से जीतीं। उसके बाद दो बार भाजपा समर्थित आशा लकड़ा ने कमान संभाली, जो अब राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की सदस्य हैं। लेकिन इस बार आशा लकड़ा की ओर से कोई दावा नहीं आया है, जिससे अन्य दावेदारों के लिए रास्ता और साफ हो गया है।

भाजपा में इस बार सबसे ज्यादा उथल-पुथल है। पार्टी के आठ प्रमुख नेता अपनी दावेदारियां पेश कर चुके हैं, और हर कोई अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठन में योगदान को हथियार बना रहा है। आइए नजर डालते हैं इन दावेदारों पर:

अशोक बड़ाईक: एक बार पार्षद रह चुके हैं और एसटी मोर्चा के महामंत्री हैं। वर्तमान में प्रदेश कमेटी में सह-मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे कहते हैं कि मेरा अनुभव शहर की समस्याओं को सुलझाने में काम आएगा।

रोशनी खलखो: दो बार पार्षद चुनी गईं, जिसमें एक बार निर्विरोध। एसटी मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। उनकी मजबूत लोकप्रियता और महिला वोट बैंक पर पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।

पिंकी खोया: महिला मोर्चा की पूर्व प्रमंडलीय प्रभारी रहीं और अब भाजपा एसटी मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता हैं। आरएसएस से गहरा जुड़ाव होने से संगठन में उनकी पैठ मजबूत है।

रामकुमार पाहन: खिजरी से एक बार विधायक रह चुके हैं और भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश प्रभारी हैं। उनका विधायकी अनुभव उन्हें प्रशासनिक मुद्दों पर मजबूत बनाता है।

नकुल तिर्की: दो बार पार्षद, एसटी मोर्चा के सदस्य हैं। आधारभूत स्तर पर सक्रियता उनकी ताकत है।

सुजाता कच्छप: दो बार पार्षद रहीं और पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता। महिला मुद्दों पर उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही है।

प्रभुदयाल बड़ाईक: प्रदेश भाजपा ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी दो बार पार्षद रह चुकी हैं, जिससे परिवार की राजनीतिक विरासत मजबूत है।

संजय टोप्पो: प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हैं। युवा नेतृत्व के रूप में उभर रहे हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गैर-दलीय चुनाव होने के बावजूद हमारा समर्थन निर्णायक होगा। दावेदारों की सूची से साफ है कि पार्टी आदिवासी समुदाय पर फोकस कर रही है।

उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में भी सरगर्मी है, लेकिन पार्टी प्रमुख हेमंत सोरेन ने स्पष्ट कर दिया है कि हर निकाय के लिए सिर्फ एक समर्थित प्रत्याशी होगा। पार्टी ने सर्वसम्मति के लिए कमेटियां गठित की हैं, जो नामों की सूची सीएम को सौंपेंगी। अभी तक तीन प्रमुख दावेदार उभरे हैं:

अंतु तिर्की: एक बार मेयर प्रत्याशी रह चुके हैं और खिजरी से झाविमो के विधायक प्रत्याशी। अब झामुमो में वापसी कर केंद्रीय सदस्य और महानगर संयोजक हैं। उनका अनुभव उन्हें मजबूत बनाता है।

वीरू तिर्की: जिला एवं महानगर संयोजक हैं। आधारभूत संगठन में मजबूत पकड़ है।

सुजीत कुजूर: सक्रिय पार्टी कार्यकर्ता हैं, जो युवा वोटर्स को आकर्षित कर सकते हैं।

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने रांची दर्पण से कहा कि सीएम हेमंत सोरेन के विदेश से लौटने के बाद पार्टी स्तर पर बैठक होगी, फिर गठबंधन दलों के साथ। तब स्थिति स्पष्ट होगी।

उधर कांग्रेस में अभी एक ही प्रमुख दावेदार है  रमा खलखो। झारखंड गठन के बाद वे पहली मेयर बनीं और अब प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। उनकी समर्पित कार्यकर्ता छवि और अनुभव उन्हें गठबंधन का मजबूत चेहरा बना सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि सीएम के आने के बाद इंडिया गठबंधन की बैठक होगी। तब तय होगा कि सर्वसम्मत प्रत्याशी होंगे या अलग-अलग।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने साथ काम किया, लेकिन निकाय चुनाव में क्या वैसी ही एकजुटता दिखेगी? गठबंधन के दल चुनावी घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर गठबंधन एक प्रत्याशी पर सहमत होता है तो भाजपा के लिए चुनौती बढ़ सकती है। लेकिन अलग-अलग लड़ने की स्थिति में वोटों का बंटवारा सभी को नुकसान पहुंचा सकता है।

रांची के मतदाताओं में भी उत्सुकता है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि चुनाव गैर-दलीय है, लेकिन पार्टियां पीछे से खेल रही हैं। उम्मीद है कि शहर की समस्याओं पर फोकस होगा, न कि सिर्फ सियासत पर।

फिलहाल जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, ये सरगर्मियां और तेज होंगी। रांची दर्पण आपको हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा। क्या आपका कोई पसंदीदा दावेदार है? हमें कमेंट्स में बताएं!

Ranchi Darpan

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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