Monday, February 16, 2026
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    झारखंड एनएचएमः 52 दागी संविदा कर्मियों की वेतनवृद्धि पर रोक, मचा हड़कंप

    रांची दर्पण डेस्क। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) झारखंड में पहली बार प्रशासनिक सख्ती का ऐसा उदाहरण सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे में हलचल मचा दी है। वार्षिक कार्य मूल्यांकन (Annual Performance Appraisal) के आधार पर 52 संविदा कर्मचारियों की वेतनवृद्धि पर रोक लगा दी गई है।

    ये वही कर्मचारी हैं, जिन पर लंबे समय से अनुपस्थिति, वित्तीय अनियमितता, कर्तव्य में लापरवाही, फर्जीवाड़ा और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे, लेकिन अब तक जांच और कार्रवाई के बीच फाइलें ही घूमती रहीं।

    स्वास्थ्य विभाग के इस कदम को एनएचएम के इतिहास में टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। कारण साफ है कि पहली बार लंबित जांचों का इंतजार किए बिना सीधे वार्षिक मूल्यांकन को हथियार बनाकर कार्रवाई की गई है।

    अफसर से लेकर तकनीकी स्टाफ

    फोटो में प्रकाशित रिपोर्ट और विभागीय समीक्षा के अनुसार, दागी कर्मचारियों की सूची में प्रखंड लेखा प्रबंधक, वित्तीय सहायक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मी, एनएचएम के तकनीकी स्टाफ और मानव संसाधन से जुड़े लोग शामिल हैं। यानी कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर असर डालने वाली है।

    आरोपों की लंबी फेहरिस्त

    इन 52 कर्मचारियों पर लगाए गए प्रमुख आरोपों में ड्यूटी से लगातार या अनधिकृत अनुपस्थिति, कार्यों में लापरवाही और मनमानी, सरकारी राशि की गलत निकासी और दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज (जन्म प्रमाण पत्र आदि) बनाने के आरोप, बिना सूचना लंबे समय तक गायब रहना, रिश्वत लेकर गलत तरीके से इंसेंटिव भुगतान आदि शामिल हैं।

    जांच चली, नतीजा नहीं, अब सीधे एक्शन

    स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में जांच रिपोर्ट पहले से मौजूद है, लेकिन प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक ढिलाई के कारण निर्णय टलता रहा। इसी से तंग आकर अब विभाग ने वार्षिक कार्य मूल्यांकन को ही कार्रवाई का आधार बना लिया है। इसका सीधा संदेश है कि अब फाइल नहीं, परफॉर्मेंस बोलेगी।

    एनएचएम के ऊपरी स्तर तक पहुंचे आरोप

    रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि एनएचएम के एक पूर्व एचआर कंसल्टेंट पर कार्यकाल के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। उन्हें स्थानांतरित तो किया गया, लेकिन लंबे समय तक उसी पद पर बने रहे। आरोपों में गलत डेटा एंट्री, बिना काम के भुगतान और सरकारी राशि के दुरुपयोग तक शामिल हैं।

    अब हर जिले की होगी कड़ी समीक्षा

    एनएचएम के अभियान निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी संविदा कर्मचारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से तैयार की जाए। पहले जिला स्तर पर गहन जांच हो। फिर राज्य मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए

    बताया गया है कि 14 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में इस व्यवस्था को और सख्त करने का निर्णय लिया गया, ताकि भविष्य में कोई भी दागी कर्मचारी लाभ न उठा सके।

    सिर्फ वेतन नहीं, नौकरी भी खतरे में

    स्वास्थ्य विभाग के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। जिन मामलों में आरोप गंभीर हैं और प्रमाण स्पष्ट हैं, वहां सेवा समाप्ति, रिकवरी और कानूनी कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।

    कर्मचारियों में हड़कंप, ईमानदारों को राहत

    इस फैसले के बाद एनएचएम के संविदा कर्मचारियों में हड़कंप है। वहीं वर्षों से शिकायत करते आ रहे ईमानदार कर्मियों ने इसे राहत भरा कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और चलता है वाली संस्कृति पर लगाम लगेगी।

    ये हैं वे नाम, जिन पर लगे गंभीर आरोप

    स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट और प्रकाशित विवरण के अनुसार दागी सूची में रिकी कुमारी चौधरी – प्रखंड लेखा प्रबंधक, कोडर (वित्तीय अनियमितता), संध्या सिंह – जांच प्रतिवेदन में कार्रवाई की अनुशंसा, निर्णय लंबित, आशाराम सोरेन – सीएचसी, चतरा (जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली), डॉ. आशुतोष कुमार – एनएचएम बहाली में भारी अनियमितता, बसंती सिन्हा – बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित, कुमार नीतीश लुगुन – अनुशासनहीनता और घोर लापरवाही, पंकज कुमार – गलत रिपोर्टिंग, जांच की अनुशंसा, मनोज कुमार – अनधिकृत अनुपस्थिति, रीतू कुमारी – ड्यूटी से अनुपस्थित, मनोज शरण – कार्य में लापरवाही, दीपक कुमार गुप्ता – कार्यस्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति, प्रदीप कुमार – वित्तीय अनियमितता, सरकारी राशि का दुरुपयोग, हिमांशु कुमार – गलत तरीके से इंसेंटिव लेने का आरोप, अवनीश प्रसाद – बार-बार गंभीर आरोप, पूर्व में स्थानांतरण, तारिक चौधरी – सरकारी राशि का दुरुपयोग, गलत डेटा एंट्री और रिश्तेदारों की फर्म को भुगतान कराने का आरोप शामिल हैं।

    बहरहाल एनएचएम झारखंड में शुरू हुई यह सख्ती सिर्फ 52 कर्मचारियों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। साफ है कि अब लापरवाही, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के लिए कोई सेफ ज़ोन नहीं बचेगा।

    स्रोतः रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय का विश्लेषण

    Ranchi Darpanhttp://ranchidarpan.com
    वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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