किडनी मरीजों को बड़ी राहत, अब रिम्स रोज तीन शिफ्ट में होगा डायलिसिस

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज कराने आने वाले किडनी मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। मरीजों की बढ़ती संख्या और आयुष्मान भारत योजना से जुड़े रोगियों की परेशानियों को देखते हुए रिम्स प्रशासन ने डायलिसिस सेंटर को तीन शिफ्ट में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब डायलिसिस की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध हो सकेगी।

रिम्स प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, डायलिसिस सेंटर का पहला शिफ्ट सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक, दूसरा शिफ्ट दोपहर दो बजे से रात 10 बजे तक और तीसरा शिफ्ट रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक संचालित होगा।

फिलहाल दो शिफ्ट में डायलिसिस की सुविधा शुरू की जा रही है, जबकि तीसरा शिफ्ट अगले एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि रात की शिफ्ट भी सुचारू रूप से संचालित हो सके।

डॉ. अशोक कुमार, नोडल अफसर, आयुष्मान भारत योजना ने बताया कि रिम्स में प्रतिदिन आयुष्मान भारत योजना के तहत 55 से 60 किडनी मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। अब तक सीमित समय में डायलिसिस होने के कारण कई मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, खासकर रात के समय गंभीर अवस्था में भर्ती मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने बताया कि दोपहर दो बजे से रात 10 बजे तक की दूसरी शिफ्ट गुरुवार से शुरू कर दी जाएगी, जबकि तीसरी शिफ्ट अगले सप्ताह से नियमित रूप से चालू हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से न केवल आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले मरीजों को बल्कि सामान्य मरीजों को भी लाभ मिलेगा। अब सभी मरीजों का डायलिसिस तीनों शिफ्ट में संभव हो पाएगा।

गौरतलब है कि वर्तमान में रिम्स में सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक नियमित रूप से डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध थी। इमरजेंसी स्थिति में टॉमा सेंटर में डायलिसिस कराना पड़ता था, जहां सीमित बेड होने के कारण कई बार मरीजों को इंतजार करना पड़ता था। विशेषकर रात के समय भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती थी।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद नेफ्रो प्लस का डायलिसिस सेंटर पूरी तरह से 24 घंटे संचालित होगा। इससे न केवल मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा, बल्कि रिम्स पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। किडनी मरीजों और उनके परिजनों ने रिम्स प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे इलाज की गुणवत्ता और उपलब्धता में और सुधार होगा।

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