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Unique protest: स्वास्थ्य मंत्री बने रिक्शा चालक, कृषि मंत्री बनीं सवारी, पहुंचे विधानसभा !

Dr. Irfan Ansari stages Unique protest against rising LPG prices and shortage by driving a rickshaw with Agriculture Minister Shilpi Neha Tirkey as passenger.

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा सत्र के दौरान एक अनोखा विरोध (Unique protest) और प्रतीकात्मक दृश्य देखने को मिला। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने रसोई गैस की कथित किल्लत और बढ़ती कीमतों के विरोध में रिक्शा चलाकर विधानसभा पहुंचने का अनूठा तरीका अपनाया। इस दौरान रिक्शे पर सवार थीं राज्य की कृषि मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की।

करीब सुबह 10:39 बजे विधानसभा परिसर के बाहर यह दृश्य राजनीतिक गलियारों और मीडिया के बीच चर्चा का विषय बन गया। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी खुद रिक्शा चालक की भूमिका में थे और उन्होंने कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को रिक्शे पर बैठाकर विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाया।

विरोध का अनोखा प्रतीकः दरअसल यह पूरा घटनाक्रम रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए किया गया।

डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों को गैस की भारी किल्लत और महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।

मंत्री अंसारी ने कहा कि केंद्र की गलत नीतियों के कारण आम जनता परेशान है। रसोई गैस आम घरों की जरूरत है और उसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से गरीब और मध्यम वर्ग की रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है।

रास्ते में बना विरोध का दृश्यः सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की पहले से ही विरोध जताने के लिए रिक्शे से विधानसभा आ रही थीं। इसी दौरान रास्ते में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की नजर उन पर पड़ी।

उन्होंने तुरंत अपना वाहन रोक दिया और प्रतीकात्मक विरोध के रूप में स्वयं रिक्शा चालक बन गए। इसके बाद उन्होंने शिल्पी नेहा तिर्की को रिक्शे पर बैठाकर विधानसभा तक पहुंचाया।

इस दौरान मौजूद लोगों और मीडिया कर्मियों के लिए यह दृश्य काफी असामान्य और ध्यान आकर्षित करने वाला था। हाकांकि यह मीडिया के लिए ही प्रयोजित की गई थी।

विपक्ष और सत्ता के बीच बढ़ती राजनीतिक नोकझोंकः विधानसभा सत्र के दौरान महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन की कीमतें अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनती रही हैं। झारखंड की सत्तारूढ़ दल के नेताओं द्वारा इस तरह का प्रतीकात्मक विरोध यह संकेत देता है कि आने वाले समय में महंगाई और रसोई गैस की कीमतें राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध जनता का ध्यान मुद्दों की ओर आकर्षित करने का एक प्रभावी राजनीतिक तरीका बनते जा रहे हैं। हालांकि आलोचक इसे केवल राजनीतिक नाटक करार देते हैं, जबकि समर्थक इसे जनता की आवाज उठाने का लोकतांत्रिक तरीका बताते हैं।

जनता के मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिशः राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विरोध केवल गैस की कीमतों का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों को उजागर करने की रणनीति भी है।

महंगाई, ईंधन की कीमतें और घरेलू खर्च जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़े हैं। ऐसे में नेताओं द्वारा इस तरह के प्रतीकात्मक कदम उठाना यह दिखाने की कोशिश है कि वे जनता की समस्याओं के साथ खड़े हैं।

हालांकि अब देखना होगा कि विधानसभा के भीतर इस मुद्दे पर कितनी गंभीर चर्चा होती है और क्या इससे किसी नीति स्तर पर कोई ठोस पहल सामने आती है या यह विरोध केवल राजनीतिक संदेश तक ही सीमित रह जाता है।  समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय/रांची दर्पण डेस्क

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मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »

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