
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची स्थित रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा और संदिग्ध रजिस्ट्री के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच शुरू कर दी है और अलग–अलग टीमों के जरिए जमीन घोटाले से जुड़े हर कड़ी को खंगाला जा रहा है।
जांच का दायरा इतना व्यापक है कि अंचल कार्यालय से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस और अतिक्रमण हटाए गए इलाकों तक एसीबी की सक्रियता देखी जा रही है।
एसीबी की टीम ने सबसे पहले बड़गाईं अंचल कार्यालय और रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर जमीन से संबंधित अहम दस्तावेजों की मांग की। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि रिम्स की अधिग्रहित जमीन का म्यूटेशन और रजिस्ट्री निजी व्यक्तियों के नाम पर की गई, जो नियमों के खिलाफ है। अब दस्तावेजों और बयानों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इस प्रक्रिया में कौन–कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई।
जांच के क्रम में एसीबी की एक टीम ने रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ और संपदा पदाधिकारी डॉ. शिव प्रिये से विस्तृत पूछताछ की। उनसे यह जानकारी ली गई कि रिम्स की कुल कितनी जमीन पर अतिक्रमण है, कितनी जमीन को अभियान चलाकर मुक्त कराया गया और अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित लोगों को नोटिस दिया गया था या नहीं।
साथ ही नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल किए गए। पूछताछ के बाद एसीबी टीम अधिग्रहण और म्यूटेशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने साथ ले गई।
एसीबी ने उन लोगों के भी बयान दर्ज किए, जिनके मकान अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में टूट चुके हैं। उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन कैसे कराई गई और इस प्रक्रिया में किन–किन लोगों की भूमिका रही। इसके अलावा बड़गाईं अंचल कार्यालय से अतिक्रमण, म्यूटेशन और मुआवजा से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
जांच के दायरे में अपार्टमेंट और चर्चित कैलाश कोठी का मामला भी शामिल है। एसीबी टीम ने फ्लैट और अन्य भवन मालिकों से पूछताछ कर उनसे संबंधित कागजात हासिल किए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में एसीबी ने झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग–अलग पहलुओं की जांच के लिए कई टीमों का गठन किया गया है।
कैलाश कोठी प्रकरण को लेकर स्थिति और भी पेचीदा हो गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर आने की बात सामने आई है, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन द्वारा कैलाश कोठी का बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया था। हालांकि कुछ हिस्से अब भी सुरक्षित हैं, जहां फिलहाल परिवार रह रहे हैं।
अंचल कार्यालय का कहना है कि कार्रवाई के वक्त स्टे ऑर्डर प्रस्तुत नहीं किया गया था और तोड़फोड़ की कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई।
अब एसीबी इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि आखिर रिम्स की जमीन की बिक्री किसने की, किन परिस्थितियों में रजिस्ट्री हुई और सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में बदलने का खेल कैसे रचा गया। आने वाले दिनों में जांच जैसे–जैसे आगे बढ़ेगी, इस बहुचर्चित जमीन घोटाले से जुड़े कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।