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गजब का शातिर है भाईः 1.82 करोड़ लेने के बाद भी मकान पर चलवा दिया बुलडोजर

CNT Act की धारा 71(ए) का हवाला देकर कार्रवाई, पीड़ितों का आरोप, समझौते के नाम पर करोड़ों रुपये लेने के बावजूद नहीं रोकी गई बुलडोजर कार्रवाई, प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पुनर्वास की मांग

रांची मधुकम में बुलडोजर कार्रवाई के बाद टूटा हुआ मकान

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के मधुकम खादगढ़ा इलाके में बुलडोजर कार्रवाई ने कई परिवारों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है। करीब 50 से 60 वर्षों से बसे परिवारों का आरोप है कि जमीन विवाद के नाम पर उनसे लगभग 1.82 करोड़ रुपये की बड़ी रकम लेने के बावजूद उनके मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे पर पहुंच रहे हैं।

दशकों से रह रहे थे, फिर भी अचानक टूटा आशियानाः पीड़ित संजय कुमार साहू समेत अन्य प्रभावित परिवारों ने अंचल अधिकारी, हेहल को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि मौजा मधुकम, खाता संख्या 179, प्लॉट संख्या 319, रकबा 48 डिसमिल भूमि पर वे लोग पिछले कई दशकों से रह रहे थे। उन्होंने यह जमीन विधिवत रजिस्ट्री डीड के माध्यम से खरीदी थी और उसी आधार पर मकान का निर्माण कराया था।

परिवारों के पास होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल, नगर निगम से जुड़े दस्तावेज सहित कई सरकारी प्रमाण मौजूद हैं, जो उनके कब्जे और निवास को प्रमाणित करते हैं। इसके बावजूद 10 फरवरी 2026 को बिना समुचित नोटिस और सुनवाई के बुलडोजर चलाकर उनके मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

धारा 71(ए) का हवाला देकर शुरू हुई कार्रवाईः आवेदकों ने आरोप लगाया है कि महादेव उरांव उर्फ महादेव तिर्की, थाना सुखदेवनगर, ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) की धारा 71(ए) के तहत पारित आदेश का हवाला देते हुए जमीन खाली कराने का दबाव बनाया। पीड़ितों के अनुसार, उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं कि यदि वे जमीन खाली नहीं करेंगे तो मकान तोड़ दिया जाएगा।

डर और दबाव के माहौल में वर्ष 2019 से 2023 के बीच आपसी समझौते के नाम पर उनसे कुल 1,08,28,125 रुपये लिए गए। पीड़ितों का कहना है कि यह रकम विवाद समाप्त करने के आश्वासन पर दी गई थी।

पैसे लेने के बाद भी नहीं रुकी कार्रवाईः परिवारों का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ। उलटे वर्ष 2024-25 में कथित रूप से न्यायालय को गुमराह कर आदेश प्राप्त किया गया और 10 फरवरी 2026 को प्रशासन की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर मकानों को गिरा दिया गया।

इस कार्रवाई से दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। कई परिवारों की वर्षों की मेहनत से बनाई गई संपत्ति मलबे में बदल गई। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों का सहारा और परिवारों की सुरक्षा सब कुछ एक झटके में छिन गया।

पहले ही प्रशासन को दी गई थी सूचनाः आवेदकों ने बताया कि उन्होंने 30 जनवरी 2026 को ही उपायुक्त, उपसमाहर्ता एवं भूमि सुधार उपसमाहर्ता, रांची को लिखित सूचना देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। इसके बावजूद उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और बुलडोजर कार्रवाई को नहीं रोका गया।

निष्पक्ष जांच और पुनर्वास की मांगः पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। कथित रूप से ली गई 1.82 करोड़ रुपये की राशि की जांच हो। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। बेघर हुए परिवारों को पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रियाः इस घटना ने जमीन विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन का विवाद था तो इतने वर्षों तक लोग वहां कैसे रह रहे थे और उनसे बड़ी रकम लेने के बावजूद कार्रवाई क्यों की गई।

फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप की जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

स्रोतः मुकेश भारतीय/मीडिया रिपोर्टस्

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