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नेवरी केंदुआ टोली में तोड़फोड़ और स्लेब चोरी, जमीन दलालों के उकसावे पर फिर बाउंड्री तोड़ा

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मेसरा (रांची दर्पण)। बीआइटी मेसरा ओपी सदर थाना अन्तर्गत रांची के नेवरी केंदुआ टोली इलाके में बाउंड्री तोड़कर स्लेब चोरी करने और जबरन रास्ता बनाने का मामला अब एक संगठित आपराधिक गतिविधि के रूप में सामने आ रहा है।

यह घटना कांके अंचल के मौजा नेवरी अंतर्गत खाता संख्या-17, प्लॉट संख्या-1335 से जुड़ी हुई है, जहां जमीन मालिक ने स्थानीय थाना, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिदेशक को लिखित शिकायत देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

रिंग रोड केंदुआ टोली अनुविज्ञप्ति धारी शराब दुकान के ठीक पिछे अवस्थित जमीन की  मौके की तस्वीरों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 7 फीट ऊँची स्लेब और ईंट से बनी बाउंड्री को पूरी योजना के साथ तोड़ा गया है।

यहां सिर्फ दीवार गिराने तक ही मामला सीमित नहीं है, बल्कि उसमें लगी स्लेब को भी उखाड़कर गायब कर दिया गया है और उसी जगह से एक अस्थायी रास्ता बना दिया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह सिर्फ चोरी की घटना नहीं, बल्कि जमीन में प्रवेश का सुनियोजित प्रयास है।

पीड़ित का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाउंड्री के पीछे की जमीन पर कई ऐसे लोगों को बसाया गया है, जिन्हें जमीन दलालों ने आदिवासी जमीन का सौदा कर गैरआदिवासी लोगों द्वारा अवैध तरीके से घर बनवा डाला है। पीड़ित के अनुसार बाउंड्री तोड़ने और स्लेब चोरी करने की ताजा घटना में यही लोग शामिल हैं, जिनके पीछे स्थानीय जमीन दलाल सक्रिय लोग भी सक्रीय हैं।

आरोप है कि पहले भी कई बार बाउंड्री को नुकसान पहुंचाया गया था और ईंट उखाड़कर चोरी की गई थी, लेकिन इस बार सीधे स्लेब तोड़कर रास्ता बना दिया गया है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से गिरोह के द्वारा करवाया जाता रहा और करवाया गया है।

पीड़ित ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस घटना को सामान्य तोड़फोड़ या मामूली विवाद मानकर न देखा जाए, बल्कि इसे सुनियोजित आपराधिक कृत्य के रूप में दर्ज किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि जिन लोगों को हाल के वर्षों में उस इलाके में बसाया गया है और जिनके नाम जमीन दलालों के माध्यम से सामने आए हैं, उनकी भी जांच की जाए।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में यह चर्चा तेज हो गई है कि शहर के बाहरी इलाकों में पहले अवैध तरीके से लोगों को बसाया जाता है और उसके बाद धीरे-धीरे आसपास की जमीन पर दबाव बनाकर रास्ता या कब्जा करने की कोशिश की जाती है। नेवरी केंदुआ टोली की यह घटना भी अब उसी पैटर्न का हिस्सा मानी जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस इस मामले को सामान्य तोड़फोड़ मानती है या संगठित तरीके से की गई स्लेब चोरी और जबरन रास्ता बनाने के अपराध के रूप में कार्रवाई करती है? स्रोतः मेसरा रिपोर्टर/रांची दर्पण

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