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स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला में करंट से वेंडर की मौत: लापरवाही, व्यवस्था और जवाबदेही पर बड़ा सवाल

A 23-year-old vendor, Junaid Ansari, died after an electric shock at the State Handloom and Saras Mela in Ranchi’s Morabadi Ground. The incident has raised serious questions over safety and electrical arrangements.

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में चल रहे स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे आयोजन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शॉट सर्किट के बाद फैले करंट की चपेट में आने से 23 वर्षीय वेंडर जुनैद अंसारी की मौत हो गयी। वह भागलपुर का रहने वाला था और मेला परिसर में हैंडमेड क्राफ्ट व कपड़ों की दुकान लगाकर रोज़ी-रोटी कमा रहा था।

घटना के बाद मेला परिसर में अफरा-तफरी मच गयी। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत जुनैद को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद एहतियातन पूरे मेला परिसर की बिजली काट दी गयी और मेले को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। लोगों को बाहर निकाला गया और किसी के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी।

कैसे हुआ हादसा? बारिश, शॉर्ट सर्किट और लापरवाही का संगमः प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शाम के समय हुई बारिश के दौरान मेला परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी थी। लोग बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट के कारण लोहे के स्ट्रक्चर में करंट फैल गया। जुनैद अंसारी ने अनजाने में लोहे को छू लिया और करंट की चपेट में आ गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, खुले तार, असुरक्षित वायरिंग और बारिश के दौरान बिजली के उचित प्रबंधन की कमी ऐसे हादसों को जन्म देती है। मेला जैसे अस्थायी ढांचे में यह जोखिम और बढ़ जाता है।

व्यवस्था पर सवाल: क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई? इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मेला परिसर में बिजली व्यवस्था का पूर्व निरीक्षण हुआ था? क्या बारिश जैसी परिस्थितियों के लिए कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल मौजूद था? क्या आयोजकों ने ग्राउंडिंग और इंसुलेशन के मानकों का पालन किया?

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई जगहों पर तार खुले थे और पानी जमा होने के बावजूद बिजली चालू थी। यदि समय रहते बिजली नहीं काटी जाती, तो यह हादसा और भी बड़ा रूप ले सकता था।

प्रशासन की भूमिका और जांच कार्रवाई की जरूरतः घटना की सूचना मिलते ही लालपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होगी?

रोजगार का साधन या जोखिम का केंद्र? स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला जैसे आयोजन छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए बड़ा मंच होते हैं। देशभर से लोग यहां आकर अपने उत्पाद बेचते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। लेकिन जब ऐसे आयोजनों में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी नहीं होते तो यह मंच उनके लिए जोखिम का कारण बन जाता है।

जुनैद अंसारी जैसे युवा अपनी मेहनत से जीवन संवारने आते हैं, लेकिन लापरवाही उनकी जान ले लेती है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का उदाहरण है।

जवाबदेही तय करना ही होगाः इस हादसे के बाद जरूरी है कि मेला आयोजकों की जिम्मेदारी तय हो। बिजली व्यवस्था की तकनीकी जांच हो। भविष्य के आयोजनों के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं। पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता मिले।

कुल मिलाकर मोरहाबादी सरस मेला हादसा एक चेतावनी है कि अस्थायी आयोजनों में सुरक्षा को हल्के में लेना कितना खतरनाक हो सकता है। अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा तो ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे। क्योंकि जुनैद अंसारी की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह एक परिवार के सपनों का अंत है और प्रशासनिक लापरवाही का कड़वा सच भी। स्रोतः रांची दर्पण/मीडिया रिपोर्टस्

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