
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के शहरी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में एक अहम फैसला लिया गया है। झारखंड राज्य योजना प्राधिकार समिति ने करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर योजना को सशर्त स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह फ्लाइओवर रांची के उन इलाकों को जोड़ने जा रहा है, जहां रोज़ाना ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है। लंबे समय से लंबित इस योजना को अब हकीकत में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे शहरवासियों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
विस्तृत अध्ययन के बाद मिली सशर्त मंजूरी
समिति ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को बिना तैयारी के नहीं, बल्कि विस्तृत अध्ययन और तकनीकी समीक्षा के बाद मंजूरी दी है। बैठक में ट्रैफिक फ्लो, भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, वाहनों की संख्या और शहरी विस्तार जैसे पहलुओं पर गंभीर मंथन हुआ। इसके बाद विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में शर्तों के साथ इस योजना को हरी झंडी दी गई। यह संकेत है कि सरकार अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ठोस और टिकाऊ समाधान की ओर बढ़ रही है।
आचार संहिता बनी अस्थायी अड़चन
हालांकि योजना को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसके क्रियान्वयन से पहले एक औपचारिक बाधा सामने है। निकाय चुनाव के मद्देनजर राज्य में आचार संहिता लागू है। समिति ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। इससे यह भी साफ होता है कि प्रशासन नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सजग है। अनुमति मिलते ही निर्माण प्रक्रिया को गति दिए जाने की संभावना है।
351 करोड़ रुपये की लागत, कई मदें शामिल
करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 351 करोड़ रुपये रखी गई है। यह राशि केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भू-अर्जन, यूटीलिटी शिफ्टिंग, पाइपलाइन शिफ्टिंग और बिजली पोल शिफ्टिंग जैसी अहम मदें भी शामिल हैं। अक्सर बड़े प्रोजेक्ट्स में इन्हीं कारणों से देरी और लागत वृद्धि होती है, लेकिन इस बार पहले से ही इन पहलुओं को लागत में शामिल करना दूरदर्शिता को दर्शाता है।
करमटोली चौक से साइंस सिटी तक सीधा संपर्क
यह फ्लाइओवर करमटोली चौक से शुरू होकर सीधे साइंस सिटी, चिरौंदी तक जाएगा। करमटोली चौक रांची का एक प्रमुख ट्रैफिक प्वाइंट है, जहां से कई महत्वपूर्ण मार्ग निकलते हैं। साइंस सिटी और आसपास के इलाकों में तेजी से बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह फ्लाइओवर भविष्य की जरूरतों को भी पूरा करेगा। इससे न केवल दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों तक पहुंच भी आसान होगी।
फोर लेन फ्लाइओवर से बढ़ेगी यातायात क्षमता
योजना के अनुसार करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर फोर लेन का होगा। इसका मतलब है कि एक साथ ज्यादा वाहन सुगमता से गुजर सकेंगे। मौजूदा सड़कों पर जहां सुबह-शाम जाम की स्थिति बनती है, वहां यह फ्लाइओवर वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि फोर लेन संरचना आने वाले 15–20 वर्षों तक बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालने में सक्षम होगी।
मोरहाबादी स्टेडियम की ओर से भी होगी एंट्री
इस परियोजना की एक खास बात यह है कि फ्लाइओवर पर चढ़ने और उतरने की व्यवस्था मोरहाबादी स्टेडियम की ओर से भी की गई है। स्टेडियम रांची का एक प्रमुख लैंडमार्क है, जहां खेल आयोजनों के साथ-साथ बड़े कार्यक्रम भी होते रहते हैं। ऐसे में स्टेडियम की ओर एक अलग रैंप बनने से आयोजनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन काफी बेहतर हो सकेगा।
500 मीटर लंबा रैंप बनेगा स्टेडियम की ओर
मोरहाबादी स्टेडियम की ओर निकलने वाला रैंप करीब 500 मीटर लंबा होगा। यह रैंप इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वाहनों का आवागमन सहज और सुरक्षित रहे। रैंप की लंबाई और ढलान को ट्रैफिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार तय किया जाएगा, ताकि तेज गति और अचानक मोड़ से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
कुल लंबाई 3.21 किलोमीटर, मुख्य हिस्सा 2.71 किमी
फ्लाइओवर की कुल लंबाई 3.21 किलोमीटर होगी, जिसमें करमटोली चौक से चिरौंदी तक का मुख्य हिस्सा 2.71 किलोमीटर का होगा। शेष लंबाई रैंप और कनेक्टिंग स्ट्रक्चर की होगी। इतनी लंबी संरचना रांची के शहरी परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ेगी और शहर की स्काईलाइन में भी बदलाव लाएगी।
शहरवासियों को जाम से मिलेगी बड़ी राहत
करमटोली, मोरहाबादी और चिरौंदी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह फ्लाइओवर किसी राहत पैकेज से कम नहीं है। रोज़ाना ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जाने वाले हजारों लोगों को ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। फ्लाइओवर के चालू होने से यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
अरगोड़ा फ्लाइओवर पर अभी संशय बरकरार
जहां करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर को मंजूरी मिल गई है, वहीं अरगोड़ा फ्लाइओवर योजना को अभी समिति की स्वीकृति नहीं मिली है। समिति ने इसके डिजाइन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। खासतौर पर अरगोड़ा चौक के पास प्रस्तावित राउंड एबाउट फ्लाइओवर को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि क्या यह वास्तव में जाम कम करेगा या नई समस्या पैदा करेगा।
जाम की आशंका पर विकल्प तलाशने के निर्देश
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि अरगोड़ा चौक के पास प्रस्तावित डिजाइन से जाम की संभावना बनती है, तो वैकल्पिक समाधान तलाशे जाएंगे। उद्देश्य केवल फ्लाइओवर बनाना नहीं, बल्कि उसे उपयोगी और प्रभावी बनाना है। सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही इस योजना पर आगे बढ़ने का फैसला लिया जाएगा।
योजनाबद्ध विकास की ओर रांची
करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर को मिली मंजूरी यह दर्शाती है कि रांची अब योजनाबद्ध शहरी विकास की ओर बढ़ रही है। केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले लिए जा रहे हैं। यदि समय पर अनुमति और निर्माण प्रक्रिया पूरी होती है, तो यह फ्लाइओवर रांची के विकास की एक मिसाल बन सकता है।
उम्मीदों के साथ आगे की राह
अब निगाहें आचार संहिता के हटने और सक्षम प्राधिकार से मिलने वाली अनुमति पर टिकी हैं। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होते ही शहरवासियों को एक नई उम्मीद मिलेगी। करमटोली–चिरौंदी फ्लाइओवर न सिर्फ सड़क का ढांचा बदलेगा, बल्कि रांची की रफ्तार को भी नई दिशा देगा।
( रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय की रिपोर्ट )










