Wednesday, February 11, 2026
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    RLSY कॉलेज में परीक्षा फीस घोटाला, लाखों रुपयों का फर्जीवाड़ा उजागर

    रांची दर्पण डेस्क। रांची यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित राम लखन सिंह यादव (RLSY) कॉलेज में एक सनसनीखेज घोटाला सामने आया है, जहां स्नातक छात्रों की परीक्षा फीस को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई। छात्रों द्वारा जमा की गई लाखों रुपयों की राशि बैंक पहुंचने से पहले ही गायब हो गई, जिससे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।

    यह मामला न केवल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ की एक खतरनाक साजिश की ओर इशारा करता है। कॉलेज ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच समिति गठित कर दी है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह घोटाला अकेला है या एक बड़ी चेन का हिस्सा?

    रांची यूनिवर्सिटी ने पिछले सप्ताह अपने अंतर्गत आने वाले कॉलेजों के लिए स्नातक (सेशन 2022-26) सेमेस्टर-5 की परीक्षा के लिए फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी किया था। छात्रों को ऑनलाइन मोड में फीस जमा करनी थी। सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 2800 रुपए और छात्राओं के लिए 1600 रुपए। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि बैंक खाते में इनमें से ज्यादातर राशि पहुंची ही नहीं।

    कई मामलों में तो केवल 1 रुपया या शून्य राशि ही जमा दिखाई दी। सेमेस्टर-5 में पढ़ने वाले करीब 800 छात्र-छात्राओं की फीस की बात करें, तो अनुमानित रूप से लाखों रुपयों का नुकसान हुआ है। उदाहरण के लिए, एक सामान्य वर्ग के छात्र की 2800 रुपए की फीस में से 2799 रुपए गायब हो गए। यह आंकड़ा हर प्रभावित छात्र के लिए डरावना है।

    यह फर्जीवाड़ा कैसे संभव हुआ? छात्रों ने बताया कि परीक्षा फीस जमा करने के दौरान वेबसाइट का सर्वर अक्सर डाउन रहता था, जिसके चलते कई छात्रों ने कॉलेज के ही एक छात्र को फीस जमा करने की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन जब छात्रों ने रिसीप्ट कॉलेज में जमा की तो एक स्टाफ सदस्य को संदेह हुआ। गहन जांच में पता चला कि रिसीप्ट में छेड़छाड़ की गई थी। बैंक में केवल 1 रुपया जमा किया गया, लेकिन रिसीप्ट पर इसे 2800 रुपए दिखा दिया गया। यह एक सोची-समझी साजिश लगती है, जहां डिजिटल रिसीप्ट को एडिट कर छात्रों को धोखा दिया गया। कॉलेज प्रशासन अब तक कई ऐसे मामले पकड़ चुका है, लेकिन पूरे घोटाले की गहराई अभी तक सामने नहीं आई है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएलएसवाई कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विष्णु चरण महतो ने तुरंत पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति में डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. स्मिता किरण टोप्पो, डॉ. एएमजेड हसनैन, विक्रांत कुमार सिंह और संतोष कुमार यादव शामिल हैं। समिति को सात दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन को अवगत कराया जाएगा।

    प्रिंसिपल डॉ. महतो ने कहा कि स्नातक 5वें सेमेस्टर के शुल्क की राशि जमा करने में फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच कमेटी के आधार पर कार्यवाही की जाएगी।

    हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब रांची यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में ऐसा घोटाला उजागर हुआ हो। पिछले साल मांडर कॉलेज में भी इसी तरह का बड़ा मामला सामने आया था, जहां छात्रों से 87.71 लाख रुपए शुल्क के नाम पर वसूले गए, लेकिन संबंधित स्टाफ ने बैंक में राशि जमा नहीं की। आरोपी स्टाफ को निलंबित किया गया, लेकिन अब तक केवल आधी राशि ही वसूली जा सकी है। यह पैटर्न सवाल उठाता है कि क्या यूनिवर्सिटी स्तर पर सिस्टम में कोई बड़ी खामी है?

    बहरहाल इस घोटाले ने छात्रों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। कई छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे गरीब परिवारों से आते हैं और फीस जमा करने के लिए कर्ज तक लिया था। अब अगर फीस दोबारा जमा करनी पड़ी तो उनका परीक्षा देना मुश्किल हो जाएगा। रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    रांची दर्पण इस मामले पर नजर बनाए रखेगा और अपडेट्स लाता रहेगा। यदि आपके पास कोई जानकारी है तो हमें संपर्क करें।

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    वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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