रांची दर्पण डेस्क। कभी रांची की जीवनरेखा मानी जाने वाली हरमू नदी बीते वर्षों में नाले का रूप ले चुकी थी, अब धीरे-धीरे अपनी पहचान वापस पाने की कोशिश में है। नगर निगम द्वारा शुरू किया गया हरमू नदी सफाई अभियान पूरे जोर-शोर से जारी है। इस दौरान 100 से अधिक सफाई मित्रों ने आधुनिक मशीनों और संसाधनों के साथ नदी के विभिन्न हिस्सों में सफाई कार्य किया।
अभियान के तहत नदी में वर्षों से जमी प्लास्टिक, पॉलीथिन, ठोस कचरा, गाद और निर्माण अपशिष्ट को हटाया जा रहा है। जेसीबी, पोकलेन और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से नदी के तल को साफ किया जा रहा है, ताकि उसका प्राकृतिक बहाव फिर से बहाल हो सके। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह केवल सतही सफाई नहीं बल्कि नदी के इको-सिस्टम को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हरमू नदी कभी साफ पानी और हरियाली के लिए जानी जाती थी, लेकिन अतिक्रमण, घरेलू कचरे और सीवेज के कारण यह बदबूदार नाले में तब्दील हो गई थी। सफाई अभियान को देखकर अब लोगों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में नदी का स्वरूप बदलेगा और आसपास का पर्यावरण भी सुधरेगा।
नगर निगम का कहना है कि यह अभियान आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है, लेकिन इसका उद्देश्य सिर्फ अंक हासिल करना नहीं है। नदी की सफाई से जलभराव की समस्या कम होगी, मच्छरों का प्रकोप घटेगा और क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। साथ ही भविष्य में नदी किनारे हरित पट्टी विकसित करने की भी योजना है।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि सफाई के साथ-साथ नदी में गंदगी फैलाने वालों पर निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे नदी को कचरा फेंकने की जगह न समझें, बल्कि इसे शहर की साझा धरोहर मानकर इसकी स्वच्छता में सहयोग करें।
कयास है कि अगर यह अभियान इसी निरंतरता और ईमानदारी से चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हरमू नदी फिर से नाले नहीं, बल्कि एक बहती नदी के रूप में पहचानी जाएगी। लेकिन अभियान की जमीनी हकीकत देखकर लगता है कि सिर्फ खानापूर्ति चल रही है।








