केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने लेखक देव कुमार को पत्र लिखकर सराहना की

लेखक देव कुमार की यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि यह झारखंड और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। बिरहोर–हिन्दी–अंग्रेज़ी शब्दकोश का भारतवाणी पोर्टल पर प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड के सुप्रसिद्ध लेखक और भाषा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत देव कुमार को उनकी अनूठी कृति बिरहोर–हिन्दी–अंग्रेज़ी शब्दकोश  के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने औपचारिक रूप से सराहना की है। यह शब्दकोश बिरहोर जनजाति की विलुप्तप्राय भाषा को संरक्षित करने और इसे डिजिटल मंच पर लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) मैसूरु ने अपने पत्र में बताया कि देव कुमार द्वारा तैयार बिरहोर–हिन्दी–अंग्रेज़ी शब्दकोश  को भारतवाणी पोर्टल www.bharatavani.in पर प्रकाशित किया गया है। यह पोर्टल भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित करने का एक महत्वाकांक्षी मंच है। इस शब्दकोश के प्रकाशन से बिरहोर भाषा, जो झारखंड की एक आदिवासी भाषा है और विलुप्त होने के कगार पर है, उसे नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस शब्दकोश को प्राथमिकता के आधार पर डिजिटल सर्च योग्य प्रारूप में परिवर्तित किया जाएगा। इससे विद्यार्थी, शोधकर्ता, भाषाविद् और समाज के अन्य लोग इस शब्दकोश का उपयोग आसानी से कर सकेंगे। यह कदम न केवल बिरहोर भाषा के प्रचार-प्रसार में सहायक होगा, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर शोध और अध्ययन के लिए भी उपलब्ध कराएगा।

बिरहोर झारखंड की एक छोटी जनजाति है, जो मुख्य रूप से रांची, हजारीबाग और गुमला जैसे जिलों में निवास करती है। उनकी भाषा, बिरहोर, ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार से संबंधित है और इसे बोलने वालों की संख्या तेजी से घट रही है। आधुनिकता और मुख्यधारा की भाषाओं के प्रभाव के कारण इस भाषा के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।

ऐसे में देव कुमार का यह शब्दकोश न केवल भाषा को संरक्षित करने का एक प्रयास है, बल्कि बिरहोर समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है।

देव कुमार ने इस सम्मान को बिरहोर समुदाय को समर्पित करते हुए कहा कि यह केवल मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि बिरहोर भाषा और संस्कृति की जीत है। मेरा उद्देश्य हमेशा से झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत को दुनिया के सामने लाना रहा है। यह शब्दकोश उस दिशा में एक छोटा सा कदम है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस शब्दकोश को तैयार करने में उन्हें कई वर्षों का शोध और बिरहोर समुदाय के बीच समय बिताना पड़ा। उन्होंने समुदाय के बुजुर्गों, स्थानीय नेताओं और भाषा विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस कार्य को अंजाम दिया। उनकी यह मेहनत अब रंग ला रही है और शिक्षा मंत्रालय की सराहना ने उनके प्रयासों को और बल प्रदान किया है।

श्री कुमार की यह उपलब्धि झारखंड के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह राज्य को जनजातीय भाषा संरक्षण के क्षेत्र में देश का एक मॉडल राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। झारखंड, जो अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और भाषाओं के लिए जाना जाता है, अब इस क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर रहा है।

देव कुमार की दूसरी कृति मैं हूँ झारखण्ड भी झारखंड की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को उजागर करने वाली एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इस पुस्तक में उन्होंने झारखंड के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।

वहीं शिक्षा मंत्रालय ने अपने पत्र में यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में बिरहोर भाषा के और साहित्य को डिजिटल रूप में लाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त CIIL द्वारा बिरहोर भाषा के शिक्षण और प्रचार के लिए विशेष कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इससे न केवल बिरहोर भाषा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में मदद मिलेगी, बल्कि यह समुदाय के युवाओं को अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व महसूस करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

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