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17 साल की पीड़ा का अंत: रांची सदर अस्पताल में 5 किलो का सर्वाइकल ट्यूमर निकाला

न्यूरोसर्जरी टीम ने जटिल सर्वाइको-डॉर्सल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया, कई अस्पतालों से निराश मरीज को सरकारी अस्पताल में मिली नई जिंदगी

Ranchi Medical News
Cervical Tumor Surgery

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल ने एक बार फिर जटिल सर्जरी में बड़ी सफलता हासिल की है। न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने 54 वर्षीय मरीज के शरीर से लगभग पांच किलो वजनी सर्वाइकल (सर्वाइको-डॉर्सल) ट्यूमर निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह ट्यूमर पिछले 17 वर्षों से धीरे-धीरे बढ़ रहा था और अब इतना बड़ा हो चुका था कि मरीज के लिए सिर झुकाना, बैठना, यहां तक कि सोना भी बेहद मुश्किल हो गया था।

17 वर्षों का दर्द, बढ़ती जटिलताएंः मरीज लंबे समय से गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से में असहनीय दर्द, भारीपन और दैनिक गतिविधियों में बाधा का सामना कर रहा था। सिर और गर्दन के अत्यंत संवेदनशील हिस्से के करीब ट्यूमर होने के कारण मामला चिकित्सकीय रूप से अत्यंत जटिल था। नसों और स्पाइनल कॉर्ड के पास स्थित इस गांठ के कारण सर्जरी में मामूली चूक भी गंभीर परिणाम दे सकती थी।

परिजनों के अनुसार मरीज ने पहले कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन ऑपरेशन के उच्च जोखिम को देखते हुए वहां सर्जरी से परहेज किया गया। लगातार बढ़ती परेशानी और निराशा के बीच अंततः मरीज ने सदर अस्पताल का रुख किया।

विशेषज्ञ टीम ने किया सफल ऑपरेशनः सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ. विकास के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने विस्तृत जांच, इमेजिंग और जोखिम आकलन के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया। कई घंटों तक चली जटिल सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ ट्यूमर को शरीर से अलग किया।

ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार समय पर उपचार न होने की स्थिति में यह ट्यूमर जीवन के लिए भी खतरा बन सकता था।

सरकारी अस्पताल की बड़ी उपलब्धिः इस सफलता पर अस्पताल प्रबंधन ने भी संतोष व्यक्त किया है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार और अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी अब उन्नत चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञता उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि ऐसे जटिल ऑपरेशन अब सदर अस्पताल में सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। यह न केवल रांची बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। कि यह सफलता टीमवर्क, आधुनिक तकनीक और मरीज के विश्वास का परिणाम है।

टीमवर्क की मिसालः इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. नीरज, डॉ. वसुंधा, डॉ. ज्योतिका और डॉ. अंचल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं ऑपरेशन थिएटर स्टाफ संजू, नूर, मंटू, सरिता और सुरेश ने भी पूरी तत्परता और समर्पण के साथ सहयोग किया।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट

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