
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में रांची नगर निगम ने एक नई और अनोखी पहल की है। मॉड्यूलर और बायो टॉयलेट के बाद अब शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से संचालित स्मार्ट टॉयलेट की शुरुआत की गई है।
धुर्वा स्थित रांची स्मार्ट सिटी क्षेत्र में शहर का पहला एआई आधारित स्मार्ट टॉयलेट स्थापित किया गया है, जो तकनीक और स्वच्छता का अनोखा संगम पेश करता है।
यह स्मार्ट टॉयलेट पूरी तरह मजबूत स्टील फ्रेम से निर्मित है और इसकी कार्यप्रणाली हवाई जहाजों में लगे आधुनिक टॉयलेट की तरह पूरी तरह सेंसर आधारित है। इसमें किसी भी तरह का मैनुअल संचालन नहीं है, बल्कि हर प्रक्रिया ऑटोमैटिक कमांड से संचालित होती है।
10 रुपये के सिक्के से खुलेगा दरवाजाः इस स्मार्ट टॉयलेट की सबसे खास बात यह है कि इसका दरवाजा 10 रुपये का सिक्का डालने पर ही खुलेगा। जैसे ही सिक्का डाला जाता है, दरवाजा स्वतः खुल जाता है और अंदर प्रवेश करते ही ऑटोमेटिक लाइट जलने लगती है। साथ ही टॉयलेट पैन में पहले से फ्लश हो जाता है, जिससे उपयोगकर्ता को पूरी तरह साफ-सुथरा वातावरण मिलता है।
इस्तेमाल के बाद जैसे ही व्यक्ति बाहर निकलता है, टॉयलेट पैन में दोबारा फ्लश होता है और फर्श पर फैला पानी अपने आप साफ हो जाता है। इससे अगला उपयोगकर्ता भी स्वच्छ टॉयलेट का इस्तेमाल कर सकेगा। बाहर निकलते ही दरवाजा स्वतः बंद होकर लॉक भी हो जाता है।
लाल-हरी लाइट से मिलेगी जानकारीः स्मार्ट टॉयलेट के बाहर गेट के पास दो बटन और इंडिकेटर लाइट लगाए गए हैं। अगर टॉयलेट के अंदर कोई मौजूद है तो लाल लाइट जलती है, जबकि टॉयलेट खाली होने पर हरी लाइट दिखाई देती है। टॉयलेट खाली होने की स्थिति में बटन दबाने पर बीप की आवाज आती है, जिसके बाद पास बने होल में सिक्का डालते ही दरवाजा खुल जाता है।
तोड़फोड़ और चोरी पर लगेगी लगामः नगर निगम ने स्मार्ट टॉयलेट में सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा है। अंदर लगी किसी भी सामग्री को नुकसान पहुंचाने या तोड़ने की कोशिश होते ही सभी सेंसर एक्टिव हो जाएंगे और दरवाजा तुरंत लॉक हो जाएगा। इससे सार्वजनिक शौचालयों में होने वाली तोड़फोड़ और चोरी की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है।
लागत सुनकर चौंक जाएंगे आपः यह हाईटेक स्मार्ट टॉयलेट काफी महंगा है। एक सीट की लागत करीब 14 लाख रुपये बताई जा रही है। वहीं महिला और पुरुष के लिए एक-एक सीट वाले टॉयलेट की कुल लागत लगभग 24 लाख रुपये है।
तुलना करें तो धुर्वा के लाइट हाउस प्रोजेक्ट में बने वन बीएचके फ्लैट की कीमत भी लगभग 14 लाख रुपये है। इसके बावजूद नगर निगम का मानना है कि स्वच्छता और रखरखाव के लिहाज से यह एक दीर्घकालिक निवेश है।
मंत्री की पहल, आगे और विस्तारः नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार की पहल पर इस पहले स्मार्ट टॉयलेट की स्थापना की गई है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, लोगों से इस टॉयलेट को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है। यदि प्रतिक्रिया सकारात्मक रही तो शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऐसे स्मार्ट टॉयलेट लगाए जाएंगे।
फिलहाल नगर निगम की यह पहल न सिर्फ रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम आगे ले जाती है, बल्कि स्वच्छता, तकनीक और नागरिक सुविधा को एक साथ जोड़ने का सफल प्रयास भी मानी जा रही है।











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