Home भ्रष्टाचार रांची में अजूबा जमीन घोटाला, किसके इशारे पर किसको बचाने में जुटा...

रांची में अजूबा जमीन घोटाला, किसके इशारे पर किसको बचाने में जुटा है कांके सीओ?

रांची (रांची दर्पण)। झारखंड की राजधानी रांची में एक अजूबा जमीन घोटाला की पृष्ठभूमि सामने आया है, जिसमें कांके अंचल अंतर्गत नेवरी मौजा स्थित एक प्लॉट की वास्तविक जमीन से अधिक रकबा दर्शाकर फर्जी जमाबंदी कर दिया गया है। हालांकि ऐसे कई मामले सामने आए है। जोकि पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी अंचलाधिकारी शीलवंत कुमार भट्ट द्वारा जमीन दलालों की शह पर अंजाम दिया गया है। इस मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने उपायुक्त रांची सहित एंटी करप्शन ब्यूरो और अन्य उच्च अधिकारियों को आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

kanke co amit bhagat
कांके अंचालाधिकारी अमित भगत का कुनबा…

आवेदन के अनुसार नेवरी मौजा के खाता संख्या 17, प्लॉट संख्या 1335 की कुल भूमि मात्र 25 डिसमिल है, जिसका दाखिल-खारिज और जमाबंदी वर्ष 2010 से पीड़ित पक्ष के नाम पर विधिवत दर्ज है। लेकिन वर्ष 2021-22 से कथित रूप से अतिरिक्त 12 डिसमिल जमीन जोड़कर कुल रकबा 37 डिसमिल दिखाया जा रहा है और उस पर रसीद भी जारी की जा रही है।

पीड़ित के अनुसार कि यह पूरा मामला राजस्व अभिलेखों में हेरफेर और कूटकरण का है। इस फर्जी जमाबंदी का सृजन तत्कालीन प्रभारी बीडीओ सह प्रभारी सीओ शीलवंत कुमार भट्ट के कार्यकाल में हुआ है। सीओ ने लगातार 3 बार बीडीओ के पद पर रहते हुए सीओ का प्रभार लिया है। उस दौरान हुए जमाबंदी की जांच की जाए तो एक बड़े भूमि फर्जीवाड़ा का खुलासा होना तय है।  साथ ही अंचल स्तर के कर्मियों और भूमि दलालों की मिलीभगत साफ उजागर हो जाएगी।

इस प्रकरण को लेकर पीड़ित ने 25 मार्च 2026 को उपायुक्त के जनता दरबार में भी शिकायत की गई थी, जहां उपायुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अंचल अधिकारी कांके को डीसीएलआऱ सदर रांची के 2 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन का निर्देश दिया था। हालांकि 12 अप्रैल 2026 तक न तो आदेश का पालन किया गया और न ही कोई अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में अब तक कोई सुधार नहीं किया गया है, जिससे पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।

पीड़ित ने उपायुक्त से मांग की है कि डीसीएलआर कोर्ट के आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, फर्जी जमाबंदी को निरस्त कर अभिलेखों की जांच की जाए तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और डिजिटल प्रविष्टियों का फॉरेंसिक परीक्षण कराने की भी मांग की गई है।

इस पूरे मामले ने रांची की राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि वर्तमान कांके सीओ अमित भगत किसके इशारे पर किसको बचाने पर उतारु है और वरीय अफसरों के निर्देश का पालन नही कर रहा है तथा जिम्मेवार वहीं पदाधिकारी भी नरम तेवर अपनाते दिख रहे हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version