कांके (रांची दर्पण/सुभाष)। कांके थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चेड़ी मनातू निवासी सचिवालयकर्मी सुषमा कुमारी अपनी कार से 16 वर्षीय बच्ची खुशबू कुमारी का शव लेकर उमेडंडा पारपोखर स्थित उसके पिता मोहन नायक के घर पहुंचीं, जिसके बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया।
मृतका खुशबू पिछले करीब चार वर्षों से सुषमा कुमारी के घर नौकरानी के रूप में काम कर रही थी। सुषमा कुमारी ने प्रारंभिक तौर पर दावा किया कि बच्ची की मौत बाथरूम में गिरने से हुई। हालांकि शव की स्थिति और परिजनों तथा ग्रामीणों के आरोपों ने इस पूरे मामले को गंभीर और संदिग्ध बना दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार बच्ची की मौत दो दिन पहले ही हो चुकी थी। शव के हाथ-पैर पर रस्सी से बांधे जाने जैसे निशान पाए गए, जबकि चेहरे, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों के स्पष्ट निशान दिखे। इन परिस्थितियों ने सामान्य दुर्घटना की आशंका को कमजोर कर दिया और हत्या या प्रताड़ना की संभावना को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
शव देखते ही ग्रामीण उग्र हो गए और तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद शव, वाहन, चालक तथा सुषमा कुमारी को पुलिस निगरानी में कांके थाना ले जाया गया।
एक साल से किसी से नहीं मिलने दिया गयाः मृतका की मौसी ललिता ने बताया कि खुशबू की मां की मृत्यु वर्ष 2018 में हो गई थी, जिसके बाद वह रिश्तेदारों के साथ रह रही थी। बाद में पिता मोहन नायक उसे अपने साथ उमेडंडा ले आए। परिवार के अनुसार लगभग पांच वर्ष पहले, जब खुशबू करीब 11 वर्ष की थी, उसे काम के लिए सुषमा कुमारी के घर भेजा गया।
पिता मोहन नायक ने बताया कि संजय मोची के माध्यम से खुशबू को काम पर लगाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनकी बेटी से बातचीत होती थी, लेकिन पिछले एक वर्ष से उसे परिवार या किसी परिचित से मिलने नहीं दिया गया। यह दावा मामले को बाल श्रम, अवैध बंधन और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना जैसे गंभीर पहलुओं से भी जोड़ता है।
बार-बार बदलते बयान से बढ़ी शंकाः पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान सुषमा कुमारी अपना बयान बार-बार बदल रही थीं। यही कारण है कि मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है। मामले में बुढ़मू थाना में शून्य प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसके बाद संबंधित थाना पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
बयान में असंगति और शव पर मिले निशान पुलिस जांच के केंद्र में हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।
यह सिर्फ मौत नहीं, व्यवस्था पर भी बड़ा सवालः यह घटना केवल एक नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है कि क्या नाबालिग बच्ची से घरेलू काम कराया जा रहा था? क्या उसे परिवार से जानबूझकर दूर रखा गया? यदि मौत दुर्घटना थी, तो शरीर पर चोट और बंधन के निशान कैसे आए? क्या समय रहते किसी ने बच्ची की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया?
घरेलू कामकाज में नाबालिग बच्चों की संलिप्तता पहले भी चिंता का विषय रही है। यह मामला बाल संरक्षण कानूनों के पालन और सामाजिक निगरानी व्यवस्था की विफलता की ओर भी संकेत करता है।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहः फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम मानी जा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और बच्ची को न्याय मिले।
बहरहाल इस घटना ने कांके और आसपास के क्षेत्रों में सनसनी फैला दी है। सभी की नजर अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
