विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही सख्ती जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आम नागरिकों को वर्षों से लंबित जमीन विवादों और दाखिल-खारिज की समस्याओं से बड़ी राहत मिल सकती है…
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची में जमीन, दाखिल-खारिज और म्यूटेशन से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन (DC) ने सख्त रुख अपनाया है। भू-राजस्व कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी सीओ, सीआई या कर्मचारी भूमाफिया के साथ सांठगांठ में पाया गया तो उसे किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
यह संदेश सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही की नई रेखा खींचने जैसा है। हाल की रिपोर्टों में भी रांची प्रशासन द्वारा भूमि मामलों में सख्ती और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे पर जोर देखा गया है।
कांके अंचल में अवैध बाउंड्री वॉल मामले में बड़ी कार्रवाईः बैठक का सबसे बड़ा निर्णय कांके अंचल से जुड़ा रहा, जहां जमीन पर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल निर्माण के मामले में एक राजस्व कर्मचारी को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया गया।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब जमीन से जुड़े मामलों में “फाइल आधारित कार्रवाई” से आगे बढ़कर मैदानी स्तर की जवाबदेही तय कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि रांची के शहरी विस्तार वाले इलाकों विशेषकर कांके, नामकुम, अरगोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण भूमाफिया की सक्रियता भी तेज हुई है। ऐसे में यह कार्रवाई कई स्तरों पर संदेश देती है कि अब राजस्व तंत्र की हर कड़ी निगरानी में है।
90 दिन से लंबित म्यूटेशन पर अनगड़ा कर्मचारी को शोकॉजः बैठक में सभी अंचलों के लंबित दाखिल-खारिज और म्यूटेशन आवेदनों की अंचलवार समीक्षा की गई। अनगड़ा अंचल में 90 दिनों से अधिक समय से लंबित म्यूटेशन आवेदन पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी को शोकॉज जारी करने का आदेश दिया गया।
यह मुद्दा आम नागरिकों के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जमीन की खरीद-बिक्री के बाद म्यूटेशन लंबित रहने से न केवल स्वामित्व विवाद बढ़ते हैं, बल्कि बैंक लोन, निर्माण अनुमति और कर भुगतान जैसी प्रक्रियाएं भी अटक जाती हैं।
10 डिसमिल से कम जमीन के मामलों पर युद्धस्तर पर कार्रवाईः उपायुक्त ने विशेष रूप से 10 डिसमिल से कम भूमि के म्यूटेशन मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा युद्धस्तर पर शिविर लगाकर किया जाए, ताकि छोटे भूखंडों के आम आवेदकों को राहत मिल सके।
यह निर्णय महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि छोटे प्लॉट से जुड़े अधिकांश मामले मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों से जुड़े होते हैं। जनता दरबार में यदि ऐसे लंबित मामले पहुंचे तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तय की गई है।
रिजेक्ट म्यूटेशन केस की रैंडम जांच होगीः प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए प्रत्येक अंचल से 10-10 रिजेक्ट म्यूटेशन मामलों की रैंडम समीक्षा का आदेश दिया है।
अपर समाहर्ता को निर्देश दिया गया है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि आवेदन को गलत तरीके से अस्वीकृत किया गया है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई की जाए।
यह फैसला उन आवेदकों के लिए राहतभरा माना जा रहा है, जो अक्सर तकनीकी कारणों या कथित भ्रष्टाचार के चलते वर्षों तक फाइलों के चक्कर लगाते रहते हैं।
पंजी-2 में गड़बड़ी पर भी प्रशासन सख्तः बैठक में पंजी-2 (Register-II) में सुधार से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। सभी अंचल अधिकारियों को पिछले दो महीने के सुधार कार्यों की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार पंजी-2 में त्रुटियां भविष्य में बड़े भूमि विवादों का कारण बनती हैं। कई मामलों में वास्तविक स्वामी का नाम रिकॉर्ड में नहीं चढ़ने से विवाद न्यायालय तक पहुंच जाता है।
क्यों अहम है यह कार्रवाई? रांची तेजी से फैलता हुआ शहरी केंद्र है। स्मार्ट सिटी, रिंग रोड, फ्लाईओवर, संस्थागत परियोजनाओं और रियल एस्टेट निवेश के कारण जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है। हाल में स्मार्ट सिटी क्षेत्र में वर्षों बाद म्यूटेशन क्लियरेंस जैसे फैसले भी इसी प्रशासनिक दबाव और सुधार की दिशा को दर्शाते हैं।
ऐसे में भूमाफिया की सक्रियता बढ़ती है। फर्जी जमाबंदी और अवैध बाउंड्री विवाद बढ़ते हैं। म्यूटेशन में देरी से नागरिक परेशान होते हैं। राजस्व कर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं उपायुक्त की यह सख्ती सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि राजस्व प्रशासन की सफाई अभियान की शुरुआत मानी जा रही है।
कुल मिलाकर रांची जिला प्रशासन का यह रुख स्पष्ट करता है कि अब जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और देरी पर सीधी कार्रवाई होगी। कांके में निलंबन और अनगड़ा में शोकॉज जैसे फैसले आने वाले दिनों में अन्य अंचलों के लिए भी मिसाल बन सकते हैं।