झारखंड HC ने हेहल CO से मांगा जवाब, कब्जा हटाने की जगह निर्माण क्यों तोड़ा?

Why Were Houses Demolished Instead of Removing Encroachment? Jharkhand HC Questions Hehal CO. High Court expresses displeasure over demolition in Sukhdev Nagar, relief continues till next hearing.

“अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें प्रशासन और संबंधित पक्षों से और स्पष्ट जवाब की उम्मीद की जा रही है…

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड हाईकोर्ट ने हेहल अंचलाधिकारी (सीओ) की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा है कि भूमि से कब्जा हटाने के बजाय निर्माण को क्यों तोड़ा गया। यह मामला सुखदेव नगर क्षेत्र में कथित रूप से आदिवासी जमीन पर दशकों से रह रहे गैर-आदिवासियों के कब्जे से जुड़ा है।

इस संबंध में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीओ द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का अवलोकन किया।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि जिन हस्तक्षेपकर्ताओं (करीब 60-70 वर्षों से मकान बनाकर रहने वाले लोगों) पर कार्रवाई की गई, उन्हें तीन बार नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद उनके मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई।

हालांकि, अदालत ने इस तर्क पर असंतोष जताते हुए कहा कि कब्जा हटाने की प्रक्रिया अलग है, जबकि निर्माण ध्वस्त करना एक अलग कार्रवाई है। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासनिक कदमों पर सवाल उठाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता महादेव उरांव से भी सवाल किया कि उन्होंने याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं से हुए समझौते और उनसे धन लेने की जानकारी क्यों छिपाई।

मामले में अदालत ने पूर्व में 13 फरवरी 2026 को हस्तक्षेपकर्ताओं (पीड़ितों) को दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक बरकरार रखा है। साथ ही पीड़क कार्रवाई पर लगी रोक भी जारी रहेगी।

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वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।
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