Durga Oraon’s big decision: झारखंड अगेंस्ट करप्शन युवा प्रकोष्ठ गठित, आर्या कुमार अध्यक्ष और अंकित पाहन बने उपाध्यक्ष

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को नई धार देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए झारखंड अगेंस्ट करप्शन (Durga Oraon’s big decision) ने अपने संगठनात्मक ढांचे का विस्तार किया है। 2 मार्च 2026 को आयोजित कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से ‘युवा प्रकोष्ठ (Youth Wing)’ के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत यंग स्कॉलर आर्या कुमार को युवा प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष तथा मीडिया स्कॉलर अंकित कुमार पाहन को केंद्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

संस्थापक अध्यक्ष दुर्गा उरांव उर्फ दुर्गा मुंडा ने इस युवा इकाई को पूर्ण स्वायत्तता, संचालन अधिकार तथा अनुशासनात्मक शक्तियाँ प्रदान करते हुए अधिकृत किया है कि वह संगठन के पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या का उपयोग आधिकारिक कार्यों में कर सकेगी। यह प्राधिकरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

कानूनी लड़ाई से जन-जागरण तक का सफरः रांची स्थित इस गैर-सरकारी संगठन ने पिछले डेढ़ दशक में मुख्यतः जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है। संगठन का नाम झारखंड हाई कोर्ट में कई अहम मामलों में याचिकाकर्ता के रूप में दर्ज रहा है।

विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े कथित 4000 करोड़ रुपये के खनन घोटाले को उजागर करने में संगठन की सक्रियता चर्चा में रही। विजिलेंस और CBI जांच की मांग को लेकर दायर याचिकाओं ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

नवंबर 2009 में कोड़ा की गिरफ्तारी के बाद दुर्गा मुंडा को ‘जायंट किलर’ की उपाधि दी गई, क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े राजनीतिक नामों को कानूनी कटघरे में खड़ा किया।

2012 में कृषि विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर भी संगठन ने PIL दायर की थी। हालांकि वह याचिका बाद में वापस ले ली गई, लेकिन इसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर व्यापक बहस छेड़ी।

आदिवासी पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय विमर्श तकः दुर्गा मुंडा राजधानी रांची के एदलहातु गांव के निवासी हैं और मुंडा जनजाति से आते हैं। सीमित शैक्षणिक और आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई को अपना मिशन बनाया।

सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दबाव और कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सक्रियता ने उन्हें झारखंड में एक प्रतीकात्मक चेहरा बना दिया है। आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और पारदर्शिता की मांग को जनांदोलन का रूप देने में उनकी भूमिका अहम रही है।

युवा प्रकोष्ठ: रणनीतिक विस्तार या वैचारिक परिवर्तन? विश्लेषकों का मानना है कि युवा प्रकोष्ठ का गठन केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव का संकेत है। अब तक संगठन की पहचान अदालत-केंद्रित रही है, लेकिन युवाओं को नेतृत्व में आगे लाने से यह आंदोलन जन-आधारित और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक सक्रिय हो सकता है।

आर्या कुमार और अंकित कुमार पाहन जैसे युवा चेहरों को नेतृत्व देने का निर्णय संगठन को शैक्षणिक संस्थानों, सोशल मीडिया अभियानों और जमीनी स्तर की मुहिमों से जोड़ सकता है। इससे भ्रष्टाचार विरोधी विमर्श को नई पीढ़ी की भाषा और तकनीक का साथ मिलने की उम्मीद है।

हालांकि संगठन की कानूनी सक्रियता प्रभावशाली रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि PIL आधारित मॉडल में लंबी कानूनी प्रक्रिया और संसाधनों की कमी बड़ी बाधा है। युवा प्रकोष्ठ को न केवल वैचारिक स्पष्टता बनाए रखनी होगी, बल्कि पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और संगठनात्मक अनुशासन का भी उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा राजनीतिक दबाव और कानूनी पेचीदगियां भी संगठन के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं।

भविष्य की चुनौतियां और दिशाः युवा शक्ति को संगठित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक जनचेतना अभियान चलाने की रणनीति झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में नया अध्याय खोल सकती है। यदि युवा प्रकोष्ठ कानूनी लड़ाई को जमीनी जागरूकता से जोड़ने में सफल रहता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

फिलहाल, 2 मार्च 2026 का यह निर्णय संगठन के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जहां अदालत की दहलीज से निकलकर आंदोलन अब युवाओं के कंधों पर सवार होकर समाज के बीच उतरने की तैयारी में है। स्रोतः मीडिया रिपोर्ट

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