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रांची की शान या शर्म? गंदगी और खतरे का अड्डा बना समाहरणालय

रांची, 19 अक्टूबर 2025 (रांची दर्पण डेस्क)। झारखंड की राजधानी रांची का समाहरणालय भवन कभी आधुनिकता और प्रशासनिक गौरव का प्रतीक था, लेकिन आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह इमारत अब रखरखाव की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। खासकर इसका बेसमेंट अब गंदगी, बदबू और खतरों का अड्डा बन चुका है। प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

समाहरणालय भवन का बेसमेंट आज ऐसी स्थिति में है कि वहां कदम रखते ही नाक पर रुमाल रखना पड़ता है। दीवारों से पानी का रिसाव लगातार हो रहा है, जिसके कारण बेसमेंट में पानी का जमाव हो गया है। वर्षों तक साफ-सफाई न होने की वजह से जमा पानी का रंग काला पड़ चुका है और इससे उठने वाली दुर्गंध लोगों के लिए असहनीय हो रही है। दीवारों पर गंदगी की मोटी काली परत जमी हुई है, जिसने पिलरों को भी बदरंग कर दिया है।

पानी के रिसाव ने बेसमेंट की संरचना को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। कई पिलरों के आधार खोखले हो चुके हैं, और उनसे सीमेंट झड़ने लगा है। लोहे की छड़ें जंग खाकर पूरी तरह सड़ चुकी हैं, और कई जगहों पर लोहे के हिस्से उखड़कर गिर रहे हैं। सीढ़ियों की हालत भी दयनीय है। लगातार पानी गिरने से सीढ़ियां टूट रही हैं और उन पर जंग की मोटी परत जमा हो गई है।

यह स्थिति न केवल भवन की मरम्मत के लिए चिंताजनक है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए भी खतरनाक साबित हो रही है। बेसमेंट में रखी पुरानी एंबेस्डर कार भी इस लापरवाही की गवाह है। पानी के रिसाव और धूल-मिट्टी के कारण यह कार अब पूरी तरह सड़ चुकी है। कभी प्रशासनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली यह गाड़ी अब केवल एक खंडहर की तरह बेसमेंट में पड़ी धूल फांक रही है।

बेसमेंट की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यह गंदगी और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। जगह-जगह शराब और पानी की खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि बेसमेंट का इस्तेमाल अनुचित गतिविधियों के लिए भी हो रहा है। सीढ़ियों पर हमेशा पानी जमा रहने से फिसलने का खतरा बना रहता है और गंदे पानी के कारण बीमारियों का जोखिम भी बढ़ गया है।

स्थानीय कर्मचारियों और आगंतुकों ने कई बार बेसमेंट की इस दयनीय स्थिति की शिकायत प्रशासन से की है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण न तो सफाई की कोई व्यवस्था की गई और न ही मरम्मत का कोई प्रयास हुआ। यह स्थिति न केवल भवन की संरचनात्मक मजबूती के लिए खतरा है, बल्कि यह प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस भवन की मरम्मत और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह भवन और भी गंभीर खतरे का कारण बन सकता है। पिलरों की कमजोरी और पानी के रिसाव से भवन की नींव को नुकसान पहुंच सकता है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा बेसमेंट में जमा गंदा पानी मच्छरों और अन्य कीटाणुओं का प्रजनन स्थल बन रहा है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है।

रांची दर्पण की ओर से प्रशासन से अपील है कि इस गंभीर स्थिति पर तुरंत ध्यान दिया जाए। समाहरणालय भवन न केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि यह रांची की पहचान का भी हिस्सा है। इसकी बदहाली को नजरअंदाज करना शहर की छवि और सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। तत्काल सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि इस भवन को और अधिक क्षति से बचाया जा सके।

Ranchi Darpan

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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