Home खेल-कूद ओरमांझी अंचल कार्यालय में बुलाकर सीओ ने ली फुटबॉलर अनुष्का की सुध

ओरमांझी अंचल कार्यालय में बुलाकर सीओ ने ली फुटबॉलर अनुष्का की सुध

The CO called footballer Anushka to the Ormanjhi Zonal Office and inquired about her.

ओरमांझी (रांची दर्पण)। राजधानी रांची के छोटे से गांव इरबा पाहन टोली की रहने वाली 14 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी अनुष्का कुमारी की सफलता ने पूरे झारखंड को गौरवान्वित किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों वीर बाला पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी अनुष्का को ओरमांझी अंचल कार्यालय में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अंचलधिकारी उज्ज्वल सोरेन ने उन्हें इलेक्ट्रिक साइकिल, ट्रैकसूट, फुटबॉल और फुटबॉल किट देकर उनका उत्साह बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

सम्मान समारोह के दौरान जब अनुष्का को इलेक्ट्रिक साइकिल और खेल सामग्री दी गई, तो उनका चेहरा खुशी से खिल उठा। छोटी कद-काठी वाली इस खिलाड़ी की आंखों में बड़े सपनों की चमक साफ दिखाई दे रही थी।

इस मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी कामवेश्वर बेदिया, जिला परिषद सदस्य सरिता देवी, प्रखंड प्रमुख अनुपमा देवी, अनुष्का के पिता दिनेश मुंडा, भाई आदि भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अंचलधिकारी ने कहा कि अनुष्का का हौसला और जज्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर अनुष्का के गांव रुक्का में खेल मैदान के निर्माण के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है। जल्द ही उपायुक्त को जमीन से संबंधित प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

अनुष्का कुमारी ने महज 12 वर्ष की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया और निरंतर कठिन अभ्यास के बल पर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वह SAFF अंडर-16 महिला चैंपियनशिप में सर्वोच्च गोल स्कोरर रह चुकी हैं और ‘गोल मशीन’ के नाम से जानी जाती हैं।

अनुष्का की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है। मां रीता मुंडा दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि पिता दिनेश मुंडा मजदूरी के दौरान हुए हादसे के बाद चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

आर्थिक तंगी के बावजूद अनुष्का ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। वह हजारीबाग स्थित आवासीय बालिका खेल छात्रावास में रहकर प्रतिदिन सात घंटे से अधिक अभ्यास करती हैं। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और सरकारी स्तर पर मिल रहा सम्मान उनके आत्मविश्वास को और मजबूत कर रहा है।

अनुष्का की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उसकी कहानी साबित करती है कि सपने बड़े हों और हौसले मजबूत, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।

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