
रांची दर्पण डेस्क। दक्षिण-पूर्व रेलवे के रांची रेल मंडल ने यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए रांची-लोहरदगा-डालटनगंज रेलखंड पर पहली बार शटल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए रेलवे मुख्यालय भेज दिया गया है। अनुमति मिलते ही इस रूट पर सस्ती, नियमित और सुविधाजनक रेल सेवा शुरू हो सकेगी, जिससे हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
रात में चलेगी ट्रेन, सुबह रांची पहुंचेगीः रेल मंडल द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार शटल ट्रेन डालटनगंज (मेदिनीनगर) से रात 11 से 12 बजे के बीच रवाना होगी और विभिन्न छोटे-बड़े स्टेशनों से गुजरते हुए सुबह करीब छह बजे रांची पहुंचेगी। योजना है कि इस रूट पर रोजाना दो ट्रिप ट्रेन चलाई जाए, ताकि दैनिक यात्रियों को समय के अनुसार विकल्प मिल सके।
क्या है शटल ट्रेन? शटल ट्रेन एक सीमित दूरी वाले मार्ग पर लगातार आगे–पीछे चलने वाली सेवा होती है। इसका उद्देश्य कम समय में अधिक यात्रियों को सुलभ परिवहन उपलब्ध कराना होता है। आमतौर पर यह सेवा विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।
सड़क से सस्ती, रेल से राहतः फिलहाल रांची से डालटनगंज तक सड़क मार्ग से यात्रा अपेक्षाकृत महंगी है। एसी बस का किराया लगभग 350 रुपये और नॉन-एसी बस का किराया करीब 300 रुपये पड़ता है। वहीं रेल किराया तुलनात्मक रूप से काफी कम है।
सेकंड सीटिंग का किराया लगभग 105-110 रुपये, स्लीपर 220-250 रुपये, थर्ड एसी 510-620 रुपये और सेकंड एसी 805-855 रुपये तक है। ऐसे में शटल ट्रेन शुरू होने से आम यात्रियों की जेब पर बोझ कम होगा।
छोटे स्टेशनों को मिलेगा नया जीवनः रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह शटल ट्रेन टोरी, चेतर, रिचुघुटू, डेमू, लातेहार, बरवाडीह, लोहरदगा, इटकी, पिस्का, अरगोड़ा सहित कई छोटे स्टेशनों से होकर चलेगी। इनमें से कई स्टेशन ऐसे हैं, जहां अब तक नियमित और सुविधाजनक रेल सेवा नहीं मिल पाती थी। शटल ट्रेन के परिचालन से इन इलाकों में आवाजाही आसान होगी और स्थानीय विकास को भी गति मिलेगी।
शिक्षा, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंचः रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह के अनुसार इस सेवा के शुरू होने से क्षेत्रीय रेल नेटवर्क मजबूत होगा। लातेहार, बरवाडीह और लोहरदगा जैसे क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रांची आने-जाने में समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
हजारीबाग के लिए भी तैयारीः इसी क्रम में हजारीबाग के लिए भी रांची-हजारीबाग वाया मेसरा शटल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजने की तैयारी है।
रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि नई शटल सेवाओं को मंजूरी मिलने के बाद झारखंड के कई जिलों को आपस में जोड़ने वाली यह पहल यात्रियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
समाचार स्रोत : मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स





