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झारखंड में ड्रग्स सिंडिकेट का बड़ा भंडाफोड़, मास्टरमाइंड मनीष तिर्की धराया, खूंटी-रांची से हजारीबाग तक फैला था नेटवर्क

पुलिस छापेमारी में 566.5 किलो डोडा, 700 ग्राम अफीम, 2.28 लाख नकद और बोलेरो वाहन जब्त

Ranchi drug syndicate

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड-बिहार का इलाका अब ड्रग्स के लिए केवल ट्रांजिट रूट नहीं रहा, बल्कि यहां स्थानीय स्तर पर भी तस्करी और सप्लाई का नेटवर्क तेजी से विकसित हो रहा है…

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार (ड्रग्स सिंडिकेट) पर पुलिस की लगातार कार्रवाई के बीच नामकुम थाना क्षेत्र में ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बुरी (जामचुआ) निवासी मनीष तिर्की के घर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में डोडा, अफीम, नकद रुपये, बोलेरो वाहन और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी संगठित नेटवर्क का मास्टरमाइंड है और गिरोह कई जिलों में सक्रिय था।

ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से कुल 566.5 किलो डोडा (अनुमानित मूल्य लगभग 85 लाख रुपये) और 700 ग्राम अफीम (अनुमानित मूल्य करीब 3.5 लाख रुपये) बरामद हुआ। इसके साथ ही 2.28 लाख रुपये नकद, एक बोलेरो वाहन, मोबाइल फोन, डिजिटल तराजू और बैंक से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार घर से 31 बोरा डोडा मिला, जबकि परिसर में खड़ी बोलेरो से चार बोरा डोडा बरामद हुआ।

कई जिलों में फैला था नेटवर्कः पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी मनीष तिर्की अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि एक संगठित गिरोह के माध्यम से मादक पदार्थों का कारोबार चला रहा था। यह गिरोह रांची के अलावा खूंटी और हजारीबाग जिलों में भी सक्रिय था। स्थानीय स्तर पर डोडा और अफीम की खरीद कर अन्य जिलों में सप्लाई की जाती थी और इसके लिए कई चारपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था।

सबसे अहम बात यह सामने आई कि गिरोह केवल नकद लेन-देन तक सीमित नहीं था, बल्कि डिजिटल माध्यम से भी पैसों का लेन-देन किया जा रहा था। इससे साफ संकेत मिलता है कि अब मादक पदार्थों का कारोबार पहले की तुलना में अधिक संगठित और तकनीकी हो चुका है।

झारखंड-बिहार बेल्ट में तेजी से बढ़ रहा ड्रग्स नेटवर्कः हाल के दिनों में झारखंड और बिहार में लगातार ड्रग्स से जुड़ी बड़ी कार्रवाई सामने आ रही है। पिछले सप्ताह ही खूंटी में पुलिस ने 39.78 किलो पोस्ता-डोडा के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें आरोपियों ने अवैध अफीम खेती में शामिल होने की बात भी कबूल की थी।

इसी तरह बिहार के पटना में 25 करोड़ रुपये मूल्य की ब्राउन शुगर और उससे जुड़ा नेटवर्क पकड़ा गया, जिसमें पुलिस ने खुलासा किया कि एक ही गिरोह कई जगहों पर ड्रग्स तैयार कर सप्लाई कर रहा था।

युवाओं और छोटे कस्बों को बना रहा निशानाः पुलिस सूत्रों के अनुसार ड्रग्स का यह नेटवर्क अब बड़े शहरों के अलावा छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक फैल चुका है। स्थानीय स्तर पर डोडा और अफीम की खरीद कर उसे बड़े बाजारों में भेजा जाता है, जबकि कुछ मामलों में छात्रों और युवाओं को भी टारगेट बनाया जा रहा है।

पिछले एक महीने में ही नामकुम रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में अवैध शराब और नशीले पदार्थों की कई छोटी-बड़ी बरामदगी हो चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि तस्करी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

सिंडिकेट की पूरी कड़ी तक पहुंचेगी जांचः ग्रामीण एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। मामले में नामकुम थाना में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

क्या झारखंड में ड्रग्स का नया हब बन रहा है? नामकुम में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या झारखंड में मादक पदार्थों का नेटवर्क तेजी से संगठित रूप ले रहा है। लगातार हो रही बरामदगी और जिलों के बीच फैलते कनेक्शन इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक नेटवर्क बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक कितनी जल्दी पहुंचती है और क्या आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा सामने आता है।

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