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मुरी यार्ड विस्तार को मिली हरी झंडी, रांची रेल डिविजन को मिलेगी नई रफ्तार

रांची रेल डिविजन के मुरी यार्ड का विस्तार, अब 14 लाइनों को स्वीकृति

रांची दर्पण डेस्क। रांची रेल डिविजन के अंतर्गत आने वाले मुरी यार्ड के विकास को लेकर रेलवे को बड़ी उपलब्धि हाथ लगी है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के तहत मुरी यार्ड में मौजूदा नौ लाइनों की जगह अब 14 लाइनों के निर्माण को औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। इस विस्तार से न केवल यार्ड की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, बल्कि रेल परिचालन भी अधिक सुरक्षित, सुचारु और समयबद्ध हो सकेगा।

रेलवे प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे माल परिवहन के दबाव और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मुरी यार्ड रांची रेल डिविजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से विभिन्न दिशाओं में माल और यात्री ट्रेनों का संचालन होता है। सीमित लाइनों के कारण अब तक रैक स्टेबलिंग, मालगाड़ियों की आवाजाही और परिचालन नियंत्रण में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

मालगाड़ियों की जांच सुविधा की संभावना

मुरी यार्ड विस्तार के बाद यहां मालगाड़ियों की बेहतर हैंडलिंग के साथ-साथ जांच सुविधाएं विकसित किए जाने की भी संभावना है। वर्तमान में रांची रेल डिविजन में मालगाड़ियों का परीक्षण नहीं होता है और इसके लिए बंडामुंडा, बोकारो, नीमपुरा और आदित्यपुर जैसे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ परिचालन लागत भी बढ़ जाती है। नई लाइनों के निर्माण के बाद मुरी यार्ड में ही इन सुविधाओं के विकसित होने से रेलवे को बड़ी राहत मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के पूर्ण होने से मालगाड़ी परिचालन में संरक्षा का स्तर और बेहतर होगा। पर्याप्त लाइनें उपलब्ध होने से रैक की सुरक्षित पार्किंग, बेहतर सिग्नलिंग और परिचालन नियंत्रण संभव हो पाएगा। इसका सीधा लाभ यात्री ट्रेनों को भी मिलेगा, क्योंकि मालगाड़ियों की भीड़ कम होने से यात्री ट्रेनों को समय पर चलाना आसान होगा।

उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

मुरी यार्ड का विस्तार रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उद्योग, व्यापार और खनिज परिवहन से जुड़े क्षेत्रों को भी सीधा लाभ मिलेगा। झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्य के लिए यह परियोजना आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक साबित हो सकती है।

रांची रेल डिविजन के डीआरएम करुणानिधि सिंह ने कहा कि नौ लाइनों की जगह अब 14 लाइनों के निर्माण की स्वीकृति मिलना डिविजन के लिए मील का पत्थर है। आने वाले वर्षों में यह विस्तार रांची रेल डिविजन को नई पहचान और नई रफ्तार देगा।

रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय की रिपोर्ट

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