“फर्जी वंशावली और दस्तावेज के आधार पर हुई जमीन की खरीद-बिक्री; एसीबी की जांच में कई और लोगों की भूमिका संदिग्ध…
रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के बहुचर्चित रिम्स जमीन घोटाले (RIMS land scam) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) समेत तीन लोगों पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। एसीबी ने इस मामले में तत्कालीन सीओ राजेश कुमार, अंचल निरीक्षक श्याम किशोर और कर्मचारी मनोज कुमार को आरोपी बनाया है।
अधिकारियों के अनुसार इस घोटाले में अन्य कई लोगों की संलिप्तता भी सामने आ रही है, जिनकी पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बताया जा रहा है कि आरोपी राजेश कुमार अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एसीबी की जांच में खुलासा हुआ है कि रिम्स की अधिग्रहित जमीन की खरीद-बिक्री फर्जी दस्तावेज और गलत वंशावली तैयार कर की गई थी।
इसी क्रम में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में कोकर आदर्श नगर कॉलोनी निवासी बिल्डर राजेश कुमार झा, दीपाटोली बांधगाड़ी निवासी राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक और खूंटी जिले के तोरपा स्थित ग्राम कुमांग निवासी चेतन कुमार शामिल हैं।
चारों आरोपियों को पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक ने फर्जी वंशावली बनाकर जमीन की खरीद-बिक्री की, जबकि अधिग्रहित भूमि पर बिल्डर के माध्यम से फ्लैट निर्माण कराया गया। वहीं चेतन कुमार ने जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल की थी।
गौरतलब है कि एसीबी ने इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान जमीन खरीदारों, अंचल कार्यालय के कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की गई।
एसीबी को इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों की भूमिका के संकेत भी मिले हैं, जिसके आधार पर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है।



