रांची सदर अस्पताल में बनेगा 200 बेड का सुपर स्पेशियलिटी विंग

“निजी अस्पतालों में ब्रोंकोस्कोपी पर जहां 10 से 15 हजार रुपये और थोराकोस्कोपी पर 30 से 40 हजार रुपये तक खर्च आता है, वहीं रांची सदर अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है…

रांची दर्पण डेस्क। राजधानी रांची के सदर अस्पताल में जल्द ही 200 बेड का अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी विंग तैयार किया जाएगा। इसके लिए जमीन चिन्हित करने के साथ-साथ डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। यह जानकारी स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना की समीक्षा बैठक के दौरान दी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बैठक में अस्पतालों की क्षमता विस्तार, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि राज्य के सभी सदर अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए डे-केयर यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही रेडिएशन थेरेपी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष बंकर निर्माण भी किया जाएगा। सभी सदर अस्पतालों को इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के अनुरूप विकसित करने पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है।

इसके तहत अस्पतालों में बेड क्षमता बढ़ाने, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। समीक्षा बैठक में बोकारो, धनबाद, सरायकेला, चाईबासा, गोड्डा और रामगढ़ के लिए तैयार डीपीआर में आवश्यक संशोधन कर पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

वहीं धनबाद, साहिबगंज, गिरिडीह, दुमका, पाकुड़ और गढ़वा के अस्पतालों के जीर्णोद्धार कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा नामकुम में 500 प्रशिक्षु क्षमता वाला अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और समग्र विकास योजना (Holistic Development Plan) पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सदर अस्पताल ने रचा नया कीर्तिमानः इस बीच सदर अस्पताल रांची ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल की है। अस्पताल ने अब तक 100 ब्रोंकोस्कोपी और थोराकोस्कोपी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं, जिससे यह राज्य का ऐसा पहला सरकारी अस्पताल बन गया है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है।

अब तक कुल 101 मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है। यह सफलता पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सौविक सरकार के नेतृत्व में मिली है। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से टीबी, निमोनिया और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का समय पर और सटीक निदान संभव हो पा रहा है।

बैठक में एंबुलेंस, ट्रॉमा, इमरजेंसी और गहन चिकित्सा सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी पर भी चिंता जताई गई और इसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

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वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।
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