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झारखंड HC में सरकार का आश्वासन, 4 सप्ताह में होगी लोकायुक्त की नियुक्ति

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड में वर्षों से खाली पड़े संवैधानिक और वैधानिक पदों को लेकर चल रही चिंता पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य सूचना आयुक्त, लोकायुक्त समेत अन्य आयोगों में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को स्पष्ट आश्वासन दिया कि लोकायुक्त की नियुक्ति चार सप्ताह के भीतर कर ली जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। केवल समिति गठन से संबंधित प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास लंबित है। मुख्यमंत्री से स्वीकृति मिलते ही लोकायुक्त की नियुक्ति की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

महाधिवक्ता के इस बयान को अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया और सरकार को चार सप्ताह का समय प्रदान किया। साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि तय समयसीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर उसकी सूचना कोर्ट को दी जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है।

लंबे समय से खाली पद, व्यवस्था पर सवालः गौरतलब है कि झारखंड में लोकायुक्त सहित कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थानों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इससे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी, शिकायतों के निपटारे और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला कदम बताया है।

लोकायुक्त की भूमिका पर बढ़ी उम्मीदः लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार के इस आश्वासन के बाद आम लोगों में उम्मीद जगी है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया मजबूत होगी। हाईकोर्ट की सख्ती को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सरकार अब नियुक्ति में अनावश्यक देरी नहीं कर पाएगी।

कोर्ट की नजर बनी रहेगीः हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि तय समयसीमा में सरकार अपने आश्वासन पर खरी नहीं उतरती है तो अदालत आगे सख्त रुख अपना सकती है। ऐसे में आने वाले चार सप्ताह झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और 2 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार अपने वादे को जमीन पर उतार पाती है या नहीं।

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