रिंग रोड भू-अर्जन घोटाला: ACB की बड़ी कार्रवाई, 17 गिरफ्तार, 17 नामजद फरार

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड में रिंग रोड भू-अर्जन मुआवजा घोटाले ने अब बड़े भ्रष्टाचार के रूप में आकार ले लिया है। धनबाद एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने इस सनसनीखेज मामले में 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि 17 अन्य नामजद अभियुक्त अभी भी फरार हैं।
एसीबी सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गोपनीय जांच के बाद की गई, जिसमें फर्जी दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और मुआवजा वितरण की परतें एक-एक कर खुलती चली गईं।
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे घोटाले का कथित मास्टरमाइंड जय निवास पांडेय उर्फ शास्त्री है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
शास्त्री पर आरोप है कि उसने भू-अर्जन प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों, दलालों और फर्जी लाभार्थियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से मुआवजा राशि की बंदरबांट की।
जांच में यह भी सामने आया है कि निरसा निवासी बप्पी राय चौधरी केवल धनबाद रिंग रोड भू-अर्जन मुआवजा घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एसीबी में दर्ज कांड संख्या 15/17 (एमपीएल मुआवजा घोटाला) का भी प्रमुख आरोपी है। एसीबी दोनों मामलों की समानांतर जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार बप्पी के खिलाफ कई ठोस सबूत मिले हैं, जिनमें फर्जी डीड पेपर तैयार कराने, जमीन के कागजात में हेराफेरी और मुआवजा राशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराने के प्रमाण शामिल हैं।
एसीबी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि रिंग रोड मुआवजा घोटाले में कम से कम एक दर्जन फर्जी डीड के आधार पर सरकारी मुआवजा उठाया गया। इस प्रक्रिया के दौरान कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा कराए गए, जिन्हें बाद में सभी आरोपितों ने आपस में मिलकर निकाल लिया। अब एसीबी उन खातों की विस्तृत जांच कर रही है और अवैध रूप से अर्जित की गई राशि को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करने की तैयारी में है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि जांच के दायरे में कुछ और प्रभावशाली नामों के आने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा रहा। एसीबी अधिकारियों ने साफ संकेत दिया है कि दोषी चाहे जितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा।
बहरहाल रिंग रोड जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में हुए इस घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें एसीबी की अगली कार्रवाई और फरार आरोपितों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।










