
रांची दर्पण डेस्क। झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) और निजी क्षेत्र के राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट की औपचारिक मंजूरी देने पर स्वास्थ्य विभाग की सहमति बन गई है।
दोनों अस्पतालों को शीघ्र ही लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके साथ ही राज्य में पहली बार बड़े स्तर पर किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
अब तक गंभीर किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद या अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता था, जिससे आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ता था। रिम्स और राज हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने से झारखंड के हजारों मरीजों को राज्य के भीतर ही उन्नत इलाज मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गठित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में न सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट के लाइसेंस पर सहमति बनी, बल्कि राज्य के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों और निजी संस्थानों में लिवर, हार्ट और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 15 जनवरी को राज्य के 10 चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, तकनीकी संसाधन और कानूनी प्रक्रियाओं पर विचार किया जाएगा, ताकि भविष्य में झारखंड को अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत एक विशेष पैकेज का निर्धारण किया गया है, जिससे किडनी, लिवर, हार्ट समेत अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज राज्य में ही संभव हो सकेगा। इससे न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
बैठक में अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, शिवनारायण सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, डॉ. संजय कुमार, डॉ. प्रकाश, डॉ. प्रज्ञा घोष पंत, ध्रुव प्रसाद, सरिता पांडेय और प्रगति शंकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला झारखंड के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से न केवल मरीजों की जान बचेगी, बल्कि राज्य का स्वास्थ्य तंत्र भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।










