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Kanke land fraud: गैरमजरूआ खास भूमि पर DC के आदेश से बोर्ड लगाया गया

कांके (रांची दर्पण)। राजधानी रांची का कांके क्षेत्र इन दिनों अवैध जमीन कारोबार (Kanke land fraud) को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से यहां जमीन दलालों और भूमाफियाओं की सक्रियता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालात ऐसे रहे हैं कि कब किसकी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री हो जाए और अंचल कार्यालय से उसकी जमाबंदी भी हो जाए, यह कहना मुश्किल रहा है।

इसी बीच जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाते हुए गैरमजरूआ खास भूमि पर सरकारी बोर्ड लगवाकर स्पष्ट कर दिया है कि उक्त जमीन सरकारी है और उसके क्रय-विक्रय की किसी भी कोशिश को अवैध माना जाएगा। यह कार्रवाई उपायुक्त रांची मंजू भजयंत्री के निर्देश पर की गई है।

फर्जी डीड और जमाबंदी का खेलः कांके अंचल क्षेत्र में एक ही जमीन की कई फर्जी डीड तैयार कर बेच देने और बाद में उसकी जमाबंदी करवा लेने की शिकायतें आम रही हैं। सूत्रों के अनुसार रसूखदार कर्मियों की पोस्टिंग और दलालों की सक्रियता ने इस खेल को और आसान बना दिया है। पूर्व में कई कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई, कुछ जेल भी गए और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक ने पूछताछ की, लेकिन व्यवस्था में ठोस सुधार नजर नहीं आया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोई आम नागरिक जमीन से संबंधित कार्य लेकर अंचल कार्यालय जाता है, तो उसे महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, दलालों के माध्यम से फाइल देने पर काम तेजी से हो जाता है, चाहे मामला विवादित या संदिग्ध ही क्यों न हो।

3.08 एकड़ सरकारी भूमि पर लगा बोर्डः उपायुक्त के निर्देश के बाद कांके अंचलाधिकारी ने मौजा सुकुरहुट्टू के थाना नंबर 154, खाता नंबर 455, प्लॉट नंबर 1333, 1335 एवं 1336, कुल रकबा 3.08 एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि पर सरकारी बोर्ड लगवाया है।

प्रशासन को सूचना मिली थी कि भूमाफिया इस सरकारी जमीन को निजी बताकर खरीदारों को गुमराह कर रहे हैं और अवैध तरीके से क्रय-विक्रय की कोशिश कर रहे हैं। संभावित ठगी से लोगों को बचाने और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से यह बोर्ड लगाया गया है।

सीआई चितरंजन टुडू एवं अमीन जितेंद्र साहू की उपस्थिति में उक्त सरकारी बोर्ड स्थापित किया गया। बोर्ड पर स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि सरकारी है और उसका कोई भी निजी लेन-देन अवैध होगा।

प्रशासनिक सख्ती से बढ़ी उम्मीदः लंबे समय बाद जिला प्रशासन की ओर से की गई इस पहल को स्थानीय लोग सकारात्मक कदम मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि इसी तरह विवादित और सरकारी जमीनों की पहचान कर स्पष्ट चिह्नांकन किया जाए तो भूमाफियाओं की गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।

हालांकि सवाल अब भी बरकरार है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम साबित होगी या फिर कुछ समय बाद हालात पहले जैसे हो जाएंगे? क्योंकि अंचल कर्मियों के लक्षण सुधरने का नाम नहीं ले रहा है और जिम्मेवार लोक सेवक भी रहस्यमय चुप्पी साधे हुए हैं।

फिलहाल, गैरमजरूआ खास भूमि पर बोर्ड लगाए जाने से यह स्पष्ट संकेत गया है कि प्रशासन जमीन घोटालों को लेकर सजग है और ठगी के शिकार होने से आम नागरिकों को बचाने की कोशिश कर रहा है।

Ranchi Darpan

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका उद्देश्य ताज़ा खबरें, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक ईमानदारी से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राँची दर्पण (Ranchi Darpan) के माध्यम से वे राजधानी राँची और उसके आसपास से जुड़ी स्थानीय खबरें, प्रशासनिक मुद्दे एवं राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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