जर्मन मिशनरी ने रांची से निकाला था झारखंड की पहली पत्रिका !

रांची दर्पण डेस्क। जर्मन मिशनरी जब 1845 में छोटानागपुर पहुंची तो उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सुसमाचार प्रचार का काम यहां की जनजातियों के बीच शुरू किया। इसी कड़ी में उन्होंने झारखंड से प्रकाशित होनेवाली सबसे पहली पत्रिका घरबंधु भी शुरू किया।

Jharkhand’s oldest newspaper, published since 1872.

इस पत्रिका का सबसे पहला अंक एक दिसंबर 1872 को निकला था। तब से यह पत्रिका आज भी लगातार प्रकाशित हो रही है। चर्च के पास इस पत्रिका के पुराने अंक आज भी सुरक्षित है। हालांकि, शुरू के लगभग एक दशक के अंक उपलब्ध नहीं है, लेकिन मई 1893 से अब तक के कई अंक आज भी सुरक्षित रखे गये हैं।

फिलहाल चर्च के लिए इस पत्रिका की जिम्मेदारी रेव्ह निरल बागे उठा रहे हैं। प्रकाशन के शुरुआती दौर में यह पत्रिका पाक्षिक थी अब मासिक हो गयी है। जब यह पत्रिका शुरू हुई तो इसमें मुख्यतः धार्मिक शिक्षा से संबंधित सामग्री होती थी, लेकिन उनमें देश दुनिया के समाचार भी प्रकाशित होते थे।

पत्रिका में अलग-अलग कॉलम होते थे। इनमें विविध समाचार, मिशन समाचार, तार की खबर जैसे कॉलम थे। मिसाल के तौर पर एक फरवरी 1897 के अंक में मिशन समाचार के तहत खबर छपी टकरमा के पादरी एडनेस डेढ़ साल की छुट्टी के लिए सपरिवार हनोवर (जर्मनी) लौट रहे हैं।

एक मार्च 1897 के अंक में हजारीबाग में अकाल से संबंधित खबर छपी। एक जून 1900 के अंक में बिरसा मुंडा की जेल में संदेहास्पद मृत्यु से संबंधित खबर छपी। 1900 के ही अंक में बिरसा आंदोलन में भाग लेनेवाले व्यक्ति कुंद्रगुटू के सुलेमान नामक व्यक्ति के भी फांसी पर चढ़ने की खबर छपी है।

इस पत्रिका में अब भी समाचार छपते हैं, लेकिन वे मिशन की खबरों पर ही केंद्रित होती हैं। यह पत्रिका चर्च के सदस्यों के लिए है। यह झारखंड के अलावा अंडमान, असम तथा देश के अन्य भागों में रहनेवाले जीइएल चर्च के सदस्यों के पास नियमित रूप से पहुंचती है।

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