संवैधानिक पदों पर बहाली को लेकर हाईकोर्ट की फटकार की अभ्यस्त हुई हेमंत सरकार
अदालत ने संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के लिए राज्य सरकार को दी समय-सीमा, जल्द न होने पर सख्त आदेश जारी करने का संकेत

रांची दर्पण डेस्क। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के संविधानिक संस्थानों खासकर राज्य सूचना आयोग, लोकायुक्त और राज्य मानवाधिकार आयोग जैसे संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने अवमानना याचिका और जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सरकार से स्पष्ट समय-सीमा तय करने को कहा, साथ ही चेताया कि यदि नियुक्तियाँ जल्द नहीं की गईं तो कोर्ट स्वयं आदेश पारित कर सकता है।
शीर्ष पदों की नियुक्तियाँ वर्षों से लंबित
सुनवाई के दौरान खंडपीठ चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर ने महाधिवक्ता राजीव रंजन से पूछा कि कब तक प्रमुख संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ पूरी की जाएंगी।
महाधिवक्ता ने बताया कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अभी भी लंबित है, लेकिन लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के लिए प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाएगा।
कोर्ट ने सरकार को मौखिक आदेश देते हुए कहा कि यदि सरकार 6 हफ्तों में नियुक्तियों को अंतिम रूप नहीं देती तो अदालत आवश्यक विधिक आदेश जारी कर सकती है। अगली सुनवाई के लिए तारीख भी निर्धारित की जा चुकी है।
जनहित याचिकाकर्ताओं का तर्क
इसी मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी सिंह और अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने अदालत को बताया कि पिछले लगभग 4 वर्षों से राज्य सरकार लगातार समय-सीमा बढ़ाती आ रही है, लेकिन संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ नहीं हो पाईं। सरकार के इसी टाल-मटोल के रवैये को हाईकोर्ट ने निराशाजनक बताया।
समस्याओं की पैमाइश बनी आयोगों में लंबित कार्य
राज्य में राज्य सूचना आयोग के सभी शीर्ष पद लम्बे समय से खाली पड़े हैं, जिससे 25,000 से अधिक आरटीआई अपील व शिकायतें लंबित हैं और आम नागरिकों को न्याय मिलने में अड़चनें आ रही हैं। सूचना कार्यकर्ताओं ने भी इस देरी पर चिंता जताई है और सरकार से जल्द नियुक्तियों की मांग की है।
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का संदर्भ
सूचना आयोगों में नियुक्ति के मामले को सुप्रीम कोर्ट भी संज्ञान में ले चुका है और वहां पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें चयन समिति द्वारा सिफारिशें भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्तियों के लिए एक समय-सीमा भी तय की थी, जिसे कई मामलों में लागू करना बाकी है।
कुल मिलाकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संवैधानिक आयोगों में नियुक्तियों को अंतिम रूप देने के लिए कड़ा अल्टीमेटम दिया है और अब सार्वजनिक निगरानी बढ़ी है। सरकार को तय समय सीमा के भीतर नियुक्तियाँ पूरी करनी होंगी, अन्यथा अदालत सख्त निर्देश जारी कर सकती है।
स्रोतः रांची दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट





